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मिलिए उस शख्स से, जिसके नाम से कांपता है ISIS

 Special News Coverage |  2015-11-29 09:35:58.0

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नई दिल्ली : जिनके नाम से दुनिया खौफ खाती है, वो एक शख्स का नाम सुनते ही कांपने लगते हैं। जो सेकेंडों में सैकड़ों को मौत के घाट उतार देते हैं। वो भी उस एक शख्स से टकराने से बचते हैं क्योंकि वो कातिलों का कातिल है। बगदादी की फौज ने उसके सिर पर करोड़ों का इनाम रखा है, लेकिन उस शख्स को अभी तक कोई छू भी नहीं पाया है।

इस शख्स का नाम रैम्बो अबू अजरायल है, जी हां इराक के लोगों ने अपने इस हीरो को यही नाम दिया है। इतना ही नहीं इसे मौत का फरिश्ता का खिताब भी मिला हुआ है। ऊंची कद-काठी, मुस्कुराता चेहरा और बेहद मिलनसार अजरायल जब लोगों के बीच होता है तो किसी हीरो की तरह इसका स्वागत किया जाता है, लेकिन जब ये मैदान-ए-जंग में उतरता है तो यमदूत बनकर दुश्मनों पर टूट पड़ता है।


अबू अजरायल ने अब तक आईएसआईएस के 1500 से ज्यादा आतंकियों को मौत के घाट उतार दिया है, जिन्हें दुनिया का सबसे खूंखार आतंकी कहा जाता है। जिस आईएसआईएस का खौफ पूरी दुनिया में फैला हुआ है वो आईएसआईएस अबू अजरायल के नाम से कांपता है।

सीने पर बुलेटप्रूफ जैकेट, एक हाथ में असॉल्ट रायफल और दूसरे हाथ में कुल्हाड़ी यही है कातिलों के कातिल अबु अजरायल की पहचान। अबु अजरायल पर इस्लामिक स्टेट ने भारी भरकम इनाम का ऐलान किया है, लेकिन आईएस का कोई आतंकी इसकी परछाई तक नहीं छू पाया है।

बता दें कि इराक के एक बड़े हिस्से पर कब्जा जमा चुके आईएस के आतंकियों को बगदाद की ओर बढ़ने से रोकने वाला शख्स कोई और नहीं अबू अजरायल ही है। यहां तक कि इस्लामिक स्टेट के कब्जे से तिररित को आजाद कराने का श्रेय भी अबु अजरायल को ही जाता है।

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आईएस के खिलाफ अबु अजरायल का दिया एक नारा आज इराक के लोगों की जुबान पर है। कुर्दिश भाषा में ये कहता है इल्ला ताहीन यानी मिट्टी में मिला दूंगा। इराक के कुर्द सेना की ओर से लड़ने वाले इस जांबाज ने दुनिया के सबसे खतरनाक आंतकी संगठन आईएसआईएस का वजूद मिटा देने की कसम खाई है और इसका ये जज्बा और जुनून इराके के लोगों के सिर चढ़कर बोल रहा है।

आपको ये जानकर हैरानी होगी कि अबु कभी यूनिवर्सिटी में लेक्चरर था। छात्रों को पढ़ाते हुए, परिवार के साथ उसकी जिंदगी बिल्कुल शांति से बीत रही थी, लेकिन जब आईएसआईएस के आतंकियों ने इसके मुल्क की ओर रूख करना शुरू किया और शियाओं का कत्लेआम होने लगा तो इसने यूनिवर्सिटी की नौकरी छोड़कर बंदूक उठा ली।

कॉलेज के जमाने में ताइक्वांडो चैंपियन रहा अबु अजरायल ने अपने मुल्क की हिफाजत के लिए कड़ी मेहनत की। हौसले की कोई कमी नहीं थी। बस जरूरत थी दुश्मन के छक्के छुड़ा देने वाली डील-डौल की। उसने रोज घंटों जिम में पसीना बहाना शुरू किया और धीरे-धीरे अपने आप को किसी पहाड़ जैसी शख्सियत के रूप में ढाल लिया। इसके बाद उसने चुन-चुनकर आईएस आतंकियों को मारना शुरू किया।

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