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पाकिस्तान के महाझूठ का पर्दाफाश, UN में गाजा की तस्वीर को कश्मीर का बताकर फंसा!

पाकिस्तान ने अंतर्राष्ट्रीय मंच पर कश्मीर को लेकर महाझूठ बोला है। संयुक्त राष्ट्र संघ को गुमराह करने की नाकाम कोशिश की है।

 Arun Mishra |  2017-09-24 13:43:57.0  |  New Delhi

पाकिस्तान के महाझूठ का पर्दाफाश, UN में गाजा की तस्वीर को कश्मीर का बताकर फंसा!

नई दिल्ली : पाकिस्तान हमेशा भारत में आतंकी हमले कराने के बाद झूठ बोलता है, लेकिन इस बार उसके महाझूठ UN में पर्दाफाश हो गया। पाकिस्तान ने अंतर्राष्ट्रीय मंच पर कश्मीर को लेकर महाझूठ बोला है। संयुक्त राष्ट्र संघ को गुमराह करने की नाकाम कोशिश की है।

संयुक्त राष्ट्र महासभा में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के भाषण के बाद UN में पाकिस्तान की सचिव मलीहा लोधी ने एक लड़की की तस्वीर दिखाई, जिसके चेहरे पर पैलेट गन के निशान थे। मलीहा ने बताया कि ये तस्वीर कश्मीर की है, जहां भारतीय सेना निहत्थे प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन इस्तेमाल कर रही है। इससे कश्मीर के तमाम नौजवान और बच्चों की आंखों की रौशनी चली जा रही है, लेकिन असल में मलीहा ने जो तस्वीर दिखाई थी वो कश्मीर की नहीं है।
दरअसल ये तस्वीर गाजा की लड़की राव्या अबू जॉम की है, जो गाजा गृहयुद्ध में पैलेट गन के से जख्मी हुई थी। 2015 में एक पत्रकार ने ये तस्वीर ट्वीट भी की थी। इस तरह से पाकिस्तान का महाझूठ दुनिया के सामने फिर से आ गया है।
गौरतलब है कि विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान का बखिया उधाड़ देने वाले बयान दिया। सुषमा ने पाकिस्तान पर शक्ति प्रहार करते हुए कहा कि पाकिस्तान की पहचान आतंकवादी देश के रुप में है। सुषमा ने पाकिस्तान को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि पाकिस्तान और भारत एक साथ आजाद हुआ था, लेकिन हमने देश में एम्स, आईआईटी, आईआईएम जैसे संस्थान बनाए हैं, जबकि पाकिस्तान ने लश्कर, जैश जैसे आतंकी संगठन बनाए हैं। सुषमा स्वराज ने कहा कि बेगुनाहों का खून बहाने वाला पाकिस्तान हमें मानवाधिकार का पाठ पढ़ा रहा है।
सुषमा ने कहा था कि वह नहीं जानतीं कि जिन्ना ने किन सिद्धांतों की पैरवी की थी, लेकिन इतना जरूर कह सकती हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पदभार संभालने के बाद शांति और दोस्ती का हाथ बढ़ाया। उन्होंने कहा, ''पाकिस्तान के प्रधानमंत्री को यह जवाब देना चाहिए कि आपके देश ने इस प्रस्ताव को क्यों ठुकराया।'' सुषमा ने अब्बासी को याद दिलाया कि नौ दिसंबर, 2015 को हार्ट ऑफ एशिया सम्मेलन के लिए जब वह इस्लामाबाद पहुंची थीं तब तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने फैसला किया था कि भारत और पाकिस्तान बातचीत बहाल करनी चाहिए और इसे 'समग्र द्विपक्षीय वार्ता' नाम दिया।

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