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पीडीपी का बड़ा फैसला, राज्यसभा सांसद नजीर अहमद लावे को पार्टी से निकाला

नजीर अहमद जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हुए थे

 Special Coverage News |  1 Nov 2019 11:46 AM GMT  |  दिल्ली

पीडीपी का बड़ा फैसला, राज्यसभा सांसद नजीर अहमद लावे को पार्टी से निकाला

पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) ने राज्यसभा सांसद नजीर अहमद लावे को पार्टी से निकाल दिया है. पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के लेकर पीडीपी ने नजीर अहमद पर सख्त कार्रवाई की है. नजीर अहमद जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हुए थे. जिससे नाराज पीडीपी ने नजीर अहमद लावे को पार्टी से निकाल दिया है.

पीपल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) के एक प्रवक्ता ने बताया, 'राज्यसभा के सदस्य नजीर अहमद लवे को पार्टी की मूल सदस्यता से निष्कासित कर दिया गया है. यह फैसला पार्टी नेतृत्व द्वारा श्रीनगर में नए नियुक्त उपराज्यपाल के शपथ ग्रहण समारोह में पार्टी के रुख को कम आंकने के मद्देनजर लिया गया है. उन्होंने बताया कि ऐसा पहली बार नहीं हुआ है जब लावे ने पार्टी विरोधी कदम उठाया है. इससे पहले भी वो इस तरह का काम कर चुके हैं.

इससे पहले, लावे ने इस साल राज्यसभा में ट्रिपल तलाक बिल के खिलाफ मतदान नहीं किए थे. इसके बाद लावे ने 5 अगस्त को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा राज्यसभा में जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन विधेयक रखे जाने से पहले पीडीपी सांसद मीर मोहम्मद फैयाज के साथ संविधान की एक प्रति को फाड़ दिया था.

पीडीपी प्रवक्ता ने आगे कहा कि नजीर अहमद लावे पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल थे. वर्तमान राजनीतिक स्थिति और अनुच्छेद 370 को लेकर उनके कदम पार्टी के उलट थी. जिसकी वजह से यह फैसला लिया गया.

बता दें कि जम्मू-कश्मीर के पहले उपराज्यपाल गिरीश चंद्र मुर्मू बने हैं. 31 अक्टूबर को जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश बन गया है. गुजरात कैडर के IAS अफसर रहे गिरीश चंद्र मुर्मू ने गुरुवार को जम्मू-कश्मीर के पहले उपराज्यपाल के तौर पर शपथ ली. गिरीश चंद्र मुर्मू को जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट की चीफ जस्टिस गीता मित्तल ने LG पद की शपथ दिलाई.

5 अगस्त को मोदी सरकार ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने का फैसला लिया था, साथ ही जम्मू-कश्मीर को केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया था. वहीं लद्दाख को अलग केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया था.

दोनों राज्यों के केंद्र शासित प्रदेश बनने के साथ अब संसद में पास होने वाले कानून सीधे तौर पर लागू होंगे. हालांकि, दोनों राज्यों में काफी अंतर रहेगा. एक तरफ जम्मू-कश्मीर विधानसभा वाला केंद्र शासित प्रदेश होगा, वहीं लद्दाख में विधानसभा नहीं होगी.

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