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झारखंड में पत्थलगड़ी का विरोध करने वाले 7 लोगों की हत्या, 3 दिन पहले किया गया था अगवा , कैसे हुआ तीन दिन में ये वाकया!

पत्थलगड़ी आदिवासी समाज की परंपरा है, जिसके जरिए गांव का सीमांकन किया जाता है, लेकिन अब इसकी आड़ में गांव के बाहर अवैध ढंग से पत्थलगड़ी की जा रही है।

 Shiv Kumar Mishra |  22 Jan 2020 7:13 AM GMT  |  चाईवासा

झारखंड में पत्थलगड़ी का विरोध करने वाले 7 लोगों की हत्या, 3 दिन पहले किया गया था अगवा , कैसे हुआ तीन दिन में ये वाकया!
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झारखंड के चाईबासा जिले में पत्थलगड़ी का विरोध करने वाले 7 लोगों की हत्या कर दी गई। इन सभी को पश्चिमी सिंहभूम के गुलीकेरा गांव में रविवार को पत्थलगड़ी समर्थकों ने अगवा कर लिया था। एडीजी मुराली लाल मीना ने बताया कि अति नक्सल प्रभावित गुलीकेरा गांव से तीन किलोमीटर दूर सभी के शव बरामद हुए हैं।

मंगलवार दोपहर इन लोगों की हत्या की सूचना मिलने के बाद एसपी इंद्रजीत महथा अन्य पुलिस अफसरों के साथ लोढ़ाई पहुंचे। इसके बाद पुलिस ने बुरुगुलीकेरा गांव के आसपास के जंगल में सर्च ऑपरेशन शुरू किया। करीब 19 घंटे के सर्च ऑपरेशन के बाद सभी शवों को बरामद किया गया।

परिजन डर से भागे, सातों को ले गए जंगल की ओर

पुलिस के मुताबिक पत्थलगड़ी समर्थकों ने रविवार को गांव में ग्रामीणों के साथ बैठक की। पत्थलगड़ी का विरोध किया तो उपमुखिया जेम्स बूढ़ और छह लोगों की पिटाई शुरू कर दी। यह देख परिजन डर गए और वहां से भाग निकले। इसके बाद पत्थलगड़ी समर्थक सातों को उठाकर जंगल की ओर ले गए। जब ये लोग नहीं लौटे तो सोमवार को इनके परिजन गुदड़ी थाना पहुंचे और पुलिस को मामले की जानकारी दी। पुलिस ने छानबीन शुरू की। इसी बीच मंगलवार दोपहर पुलिस को सूचना मिली कि इन सातों की हत्या कर दी गई और शवों को जंगल में फेंक दिया गया है। इसके बाद पुलिस ने शवों की तलाश शुरू की। झारखंड में पत्थलगड़ी के समर्थन में अब तक कई घटनाएं हो चुकी हैं। लेकिन इतनी बड़ी वारदात पहली बार हुई है।

कब क्या हुआ

पहला दिन 19 जनवरी, रविवार गांव में पत्थलगड़ी समर्थकों ने बैठक की। सात लोगों की पिटाई की।

दूसरा दिन

20 जनवरी, सोमवार, बैठक से भागे उप मुखिया के परिजनों व अन्य ने गुदड़ी पुलिस को सूचना दी।

तीसरा दिन

21 जनवरी, मंगलवार, एसपी ने रणनीति बनाई। सोनुआ के रास्ते घटनास्थल रवाना हुए।

चौथा दिन

22 जनवरी, बुधवार 19 घंट के सर्च ऑपरेशन के बाद पुलिस ने अगवा किए गए सभी लोगों के शव बरामद कर लिए।

पत्थलगड़ी क्या है?

पत्थलगड़ी आदिवासी समाज की परंपरा है, जिसके जरिए गांव का सीमांकन किया जाता है, लेकिन अब इसकी आड़ में गांव के बाहर अवैध ढंग से पत्थलगड़ी की जा रही है। पत्थर पर ग्राम सभा का अधिकार दिलाने वाले भारतीय संविधान के अनुच्छेदों (आर्टिकल) की गलत व्याख्या करते हुए ग्रामीणों को आंदोलन के लिए उकसाया जा रहा है।

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