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कर्नाटक के राजनीतिक संकट पर सुप्रीम कोर्ट के अगले आदेश तक रोक

कर्नाटक का सियासी नाटक अभी भी जारी है सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी यह थमने का नाम नहीं ले रहा है।

 Sujeet Kumar Gupta |  12 July 2019 7:45 AM GMT  |  नई दिल्ली

कर्नाटक के राजनीतिक संकट पर सुप्रीम कोर्ट के अगले आदेश तक रोक
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कर्नाटक। कर्नाटक का सियासी नाटक अभी भी जारी है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी यह थमने का नाम नहीं ले रहा है। गुरुवार के सुनवाई के बाद फिर से विचार करने के लिए शुक्रवार का दिन रखा गया। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने विधायकों के इस्तीफे के मुद्दे पर सुनवाई करते हुए, इस्तीफा देने वाले विधायकों को गुरुवार शाम छह बजे तक स्पीकर के सामने पेश होने का आदेश दिया था। लेकिन इस फैसले के बाद स्पीकर रमेश कुमार ही सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए है। और इस मोहलत को बढ़ाने की अपील की है। सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका सुनने के लिए हामी तो भर दी है, लेकिन इस मामले पर शुक्रवार को सुनवाई होगी। ऐसे में विधायकों को गुरुवार 6 बजे तक स्पीकर के सामने पेश होना होगा।

कर्नाटक विधानसभा के मसले पर शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू हो गई तो विधायकों की तरफ से पेश हुए मुकुल रोहतगी ने कोर्ट को बताया कि विधानसभा स्पीकर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि विधायक सुप्रीम कोर्ट क्यों गए थे, मैं तो यहां था मेरे पास आना था। उन्होंने कहा कि स्पीकर के खिलाफ अदालत को एक्शन लेना चाहिए। वो बार-बार कह रहे हैं कि उन्हें इस्तीफा पढ़ना है, लेकिन एक लाइन के इस्तीफे में वह कितनी बार पढ़ेंगे। मुकुल रोहतगी ने कहा कि स्पीकर ने राजनीतिक वजह से हमारा इस्तीफा मंजूर नहीं किया गया। जिस पर टिप्पणी करते हुए चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा कि क्या विधानसभा स्पीकर सुप्रीम कोर्ट की अथॉरिटी को चैलेंज कर रहे हैं। क्या स्पीकर हमें ये कह रहे हैं कि अदालत को इससे दूर रहना चाहिए।

हालांकि स्पीकर की तरफ से पेश हुए अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि अभी विधायकों पर सदस्यता खत्म करने का भी मामला चल रहा है, ऐसे में इस्तीफे की बात कहां से आ सकती है। स्पीकर के साथ बैठक में विधायकों ने माना है कि वह रिजॉर्ट गए लेकिन इस्तीफे के लिए स्पीकर से नहीं मिले। कर्नाटक के मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी की तरफ से पेश हुए राजीव धवन ने कहा कि लोगों ने एक जनादेश दिया है, ये विधायक उसका अपमान कर रहे हैं। आप हमें बता दीजिए कि स्पीकर की जिम्मेदारी क्या है। संविधान में कहा गया है कि स्पीकर अपने हिसाब से इस्तीफे पर फैसला कर सकता है।

अभिषेक मनु सिंघवी की तरफ से अदालत को दलील दी है कि सभी बागी विधायकों ने वीडियो में ये स्वीकार किया है कि उन्होंने स्पीकर को मिलकर इस्तीफा नहीं सौंपा है। सिंघवी की तरफ से अदालत को स्पीकर रमेश कुमार का हलफनामा और विधायकों का वीडियो दे दिया गया है. विधायकों ने ये भी स्वीकार किया है कि जब स्पीकर अपने दफ्तर से जा चुके थे, तब वो लोग इस्तीफे के बाद बात करने पहुंचे थे।

बतादें कि सुप्रीम कोर्ट ने आज फैसले पर चर्चा के बाद आदेश दिया कि कर्नाटक विधानसभा स्पीकर रमेश कुमार को वो अगले मंगलवार तक कोई फैसला ना लें. इस दौरान स्पीकर ना तो विधायकों के इस्तीफे पर और ना ही अयोग्य करार होने पर फैसला ले सकते हैं। अब इस मसले पर मंगलवार को सर्वोच्च अदालत में सुनवाई होगी।

गुरुवार को कर्नाटक के बागी विधायकों ने मुंबई से दो फ्लाइट से बेंगलुरु आये। इसके बाद विधानसभा स्पीकर से मिलने पहुंचे। बागी विधायक कड़ी सुरक्षा के बीच भागते हुए स्पीकर के पास पहुंचे. कर्नाटक के बागी विधायक बी बसावराज, रमेश जारकिहोली, शिवराम हेब्बर, बीसी पाटिल, सोमशेकर, नारायण गौड़ा, गोपाल, विश्वनाथ, महेश कुमताहल्ली और प्रताप पाटिल समेत 11 बागी विधायक स्पीकर के चैंबर में प्रवेश कर गए हैं। फिलहाल ये विधायक विधानसभा स्पीकर से मुलाकात कर रहे हैं. वहीं, विधानसभा में सुरक्षा के जबरदस्त इंतजाम किए गए हैं।

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