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घरेलू विधवा महिला से आर्मी कैप्टन और फिर मिसेज इंडिया क्लासिक क्वीन ऑफ सबस्टेंस तक चुनौतियां, शालिनी सिंह का इम्तिहान लेती गईं

दो ही घंटे बाद दूसरी कॉल आई-‘मेजर अविनाश सिंह शहीद हो गए’। एक पल के लिए तो शालिनी सिंह को लगा कि दुनिया ही खत्म हो गई।

 Special Coverage News |  30 Aug 2019 7:43 AM GMT  |  दिल्ली

घरेलू विधवा महिला से आर्मी कैप्टन और फिर मिसेज इंडिया क्लासिक क्वीन ऑफ सबस्टेंस तक चुनौतियां, शालिनी सिंह का इम्तिहान लेती गईं
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सत्यम सिंह बघेल

घरेलू विधवा महिला से आर्मी कैप्टन और फिर मिसेज इंडिया क्लासिक क्वीन ऑफ सबस्टेंस तक चुनौतियां शालिनी सिंह का इम्तिहान लेती गईं और वो इम्तहान देती गईं। उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले में जन्मी शालिनी सिंह के जीवन में 28 सितंबर 2001 का दिन मानो आसमान से गिरी बिजली के जैसा करंट भरा पड़ा था। जब कश्मीर से आए उस फोन कॉल में संदेशा था कि 'मेजर अविनाश गोलियां लगने से बुरी तरह घायल हो गए हैं।' दो ही घंटे बाद दूसरी कॉल आई-'मेजर अविनाश सिंह शहीद हो गए'। एक पल के लिए तो शालिनी सिंह को लगा कि दुनिया ही खत्म हो गई।

लेकिन बार बार निगाह पास ही खेल रहे ध्रुव पर जाती थी। गोद में खेलता उनका मासूम बेटा ही शालिनी की ताकत बना। उन्होंने बेहद मजबूती से खुद को सम्भाला और निर्णय लिया कि मैं भी आर्मी में जाऊंगी। परिवार वालों को यकीन नहीं हो रहा था कि घरेलू-सी ये महिला कैसे कर पाएगी। डेढ़ साल के बेटे को छोड़कर ट्रेनिंग कैसे करेंगी? कहां तैनाती होगी? क्या दूर-दराज के इलाके में जाना होगा? किसी के लिए यकीन करना मुश्किल था कि कुछ ही दिन पहले हुई विधवा और डेढ़ साल के बेटे की मां ऐसा सोच भी सकती है। ये तमाम सवाल उठ रहे थे लेकिन इनके सारे जवाब उनके संकल्प ने दे दिए।

लेकिन इस फैसले तक पहुंचने का फासला तय करना बेहद तकलीफ भरा था। शालिनी सिंह ने सर्विस सलेक्शन बोर्ड (SSB) की परीक्षा दी और शालिनी का सलेक्‍शन हो गया था। इलाहाबाद में इंटरव्यू के लिए एक हफ्ते रहना हुआ। ये अनुभव किसी भी मां के लिए बेहद कष्टदायक था क्योंकि SSB सेंटर में बच्चे के साथ नहीं रहा जा सकता था और बच्चा कुछ ज्यादा खाता पीता ही नहीं था। उनकी माँ बेटे को लेकर सेंटर के बाहर बैठती, शालिनी सिंह का इंतजार करती थीं। समय मिलते ही शालिनी थोड़ी देर के लिए सेंटर से बाहर आती और बच्चे को कुछ खिला-पिलाकर फिर मां के पास छोड़कर चलीं जाती। रात तो और भी विभत्स होती थी।

इसके बाद ऑफीसर्स ट्रेनिंग एकेडमी (OTA) चेन्नई में हुई ट्रेनिंग ने तो जिंदगी ही उलट-पुलट कर दी। मानसिक और शारीरिक दोनों मोर्चों पर चुनौती का मुकाबला करना पड़ रहा था। लेकिन शालिनी सिंह भी हार मानने वालों में से कहाँ थी, तमाम संघर्षों के बाद भी उन्होंने ट्रेंगिग पूरा किया। 7 सितंबर 2002 का दिन था, यानि शालिनी के पति की शहादत की बरसी के सिर्फ बीस दिन शेष थे और शालिनी को सेना में कमीशन हासिल हो गया। इस बीच पति को कीर्ति चक्र (मरणोपरांत) से नवाजा गया। शालिनी ने फौज की वर्दी पहनी और राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम से पति का सम्मान प्राप्त किया।

छह साल सेना की नौकरी के बाद रिटायरमेंट का फैसला लिया। बेटे को मां की जरूरत अब भी वैसे ही थी। मां के बिना बेटे ने काफी उम्र बिताई अब शालिनी उसे और अपने से दूर नहीं रखना चाहती थी। इसी बीच परिवार वालों के दबाव में आकर 2008 में शालिनी ने अपने सीनियर मेजर एसपी सिंह से दूसरी शादी कर ली। शादी के कुछ समय में ही मेजर शालिनी से मारपीट करने लगा तथा 2011 में तो मेजर ने शालिनी के सिर पर गिलास से ऐसा हमला किया कि उसे 32 टाँके लगवाने पड़े। इसके बाद शालिनी ने अपने दूसरे पति से तलाक ले लिया।

शालिनी सिंह के लिए यहां से आगे बढ़ना काफी मुश्किलों भरा सफर था कि तलाक के कुछ समय बाद ही कार दुर्घटना की वजह से उन्हें 1 साल तक बेड रेस्ट करना पड़ा। चुनौतियां शालिनी सिंह का इम्तिहान लेती गईं और वो इम्तिहान देती गईं। वो ठीक हुई, फिर कुछ बड़ा करने का ठाना। अनन्तः उनकी संकल्प शक्ति के आगे सारी चुनौतियों ने भी घुटने टेक दिए। शालिनी सिंह ने वर्ष 2017 मे मिसेज इंडिया क्लासिक क्वीन ऑफ सबस्टेंस (MIQS) का खिताब जीतकर अपने नाम किया। साथ ही वे एक कंपनी में बतौर सीनियर मैनेजर कार्यरत हैं। इसके अलावा सामाजिक कार्यकर्ता हैं। विकलांग बच्चों के लिए चन्दा जुटाकर उनकी सहायता भी करती हैं।

इनसे हम प्रेरणा ले सकते हैं कि कैसे जिंदगी की चुनौतियों का सामना करके आगे बढ़ा जाता है। चुनौतियों पे चुनातियाँ देना जिंदगी का काम है, चुनौतियों से सीखकर आगे बढ़ना जिंदगी इसी का नाम है और शालिनी सिंह ने यह शाश्वत कर दिखाया है।

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