Top
Home > लाइफ स्टाइल > देखिये, मर्द दो तरह के होते है, एक वो जो घर के बाहर राज करते हैं, दूसरे वो उनकी औरते मुँह पर कपडा बांधकर चलती हैं, हंसिये मत मेरे पास लाजिक है

देखिये, मर्द दो तरह के होते है, एक वो जो घर के बाहर राज करते हैं, दूसरे वो उनकी औरते मुँह पर कपडा बांधकर चलती हैं, हंसिये मत मेरे पास लाजिक है

 Special Coverage News |  7 Sep 2019 5:34 AM GMT  |  दिल्ली

देखिये, मर्द दो तरह के होते है, एक वो जो घर के बाहर राज करते हैं, दूसरे वो उनकी औरते मुँह पर कपडा बांधकर चलती हैं, हंसिये मत मेरे पास लाजिक है
x

मनीष कुमार

जी खोल के नाच ले गोरी-शैमपेन के शावर मे,

यार तेरे का फैन मिनिस्टर, बैठा है जो पावर मे

देखिए. कवि पहले तो अपनी हैसियत इस्टाब्लिश कर रहा है। वह खासोआम को क्लीयर करता कि वह अपनी गोरी को शैम्पेन के शावर मे नहलाना अफोर्ड कर सकता है। जहां आम आदमी आठ हजार की बोतल भी निचोड़ कर पी जाए, वहां गोरी को शैम्पेन से नहला देने का विचार ही काफी एक्सपेंसिव है।

दूसरा, वो ये भी कन्फर्म कर देता है कि स्टेट के मन्त्री जी से उसका खासा गहरा सम्बन्ध है। अतएव किसी ने डांस के दैरान गोरी से छेड़छाड़ की, तो मिनिस्टर से कहकर उस छेड़कर्मी को तत्काल अन्दर करवा दिया जाएगा। जहां संबंधित की भुरकुस पिटान होने की प्रबल संभावना है।

दरअसल इसके पूर्व गोरी, डीजे वाले बाबू से निंरतर अपना गीत बजाने का निवेदन करती है। वाल्यूम को उंचा करके, बेस का बढाने का भी बारंबार आग्रह करती है। मगर जब किसी अडियल सरकारी बाबू की तरह , डीजे बाबू उसका गीत नहीं बजाता, तो मजूबरी मे गोरी के यार को मामला अपने हाथों मे लेना पड़ता है। डीजे वाले बाबू से उसका गाना बजवाते हुए, उसकी सुरक्षा की भी गांरटी लेता हैं। गोरी को आशवस्त करता है कि -

ऐसा गोरी काम करा दू, डांस फ्लोर तेरे नाम करा दूँ

घूर के देखे जो कोई तुझको, कान पे उसके चार लगा दूँ

इन वचनों को सुनकर गोरी को काफी तसल्ली हुई होगी, ऐसा मेरा यकीन है. संभव है, उसने जी भर के शराब पी हो, तत्पश्चात मन भर नाचा भी हो. मै इस गीत का फैन हूँ, और काफी इंस्पायर्ड भी फील करता हूँ.

हंसियेगा मत. मेरे पास लाजिक है.

देखिये, मर्द दो तरह के होते है. एक वो जो घर के बाहर की दुनिया पर राज करते हैं. उनकी पहुँच, पकड , हैसियत है. उनकी ... "चलती है". उनके घर की औरत डांस फ्लोर पर शैम्पेन से नहा भी ले, तो भी आम आदमी की हिम्मत नहीं की आँख उठाकर देख ले.

दूजे किस्म के भी मर्द हैं. उनकी औरते मुँह पर कपडा बांधकर चलती हैं. डांसफ्लोर तो बहुत दूर की बात, साड़ी पहन कर सब्जी भी लेने जाये, तो छिड़ कर आने का पूरा चांस है. ऐसे मर्द "काँण के नीचे चार लगा दूं" वाली हुनक उतारते तो हैं, मगर बहू बेटियों पर. अगर वो जींस पहन कर निकल जाये तो, अगर ड्रेस जरा ग्लेमरस पहन जाये तो, अगर खुश होकर किसी ओकेजन में दो ठुमके लगा दिए तो.

दूजे किस्म के मर्द.. भी आखिर मर्द हैं. मर्द अपनी कमजोरी नहीं स्वीकारते. वे बाहर इस व्यवस्था के हरकारे भी हैं, और भीतर से हारे हुए भी हैं. जानते है, उनकी हैसियत नहीं की अपनी औरत को दुनिया की ललचाई नजरो से सुरक्षा दे सकें.

उन्हें पता है कि "जिसकी लाठी-उसकी भैस" वाली सरकार और सोसायटी जो उन्होंने बनायीं है, वह वक्त आने पर उन्हें संरक्षण और न्याय दिला नहीं सकती. लिहाजा पहली कोशिश की बेटी पैदा ही न हो. अगर पैदा होने की इजाजत दी तो ढंककर, छिपकर, सात तालो में बंद रहे. निकले तो नकाब लगा ले यही श्रेयस्कर है.

ऐसा डरा हुआ मर्द, अपने भय को संस्कृति, कल्चर, लोकलाज के कलेवर में पेश करता हैं. घोषणा करता है हमारे घर में, हमारे खानदान में, हमारे धर्म में.. "ऐसा नही होता".

मस्ती से नाचती हुई बेटी क्या आपके दिल में भय का संचार करती है. अगर हाँ, तो आप दूजे किस्म के मर्द हैं. आपको बादशा का ये रैप सुनना चाहिए.

ऐसा बेटी काम करा दू, डांस फ्लोर तेरे नाम करा दूँ

घूर के देखे जो कोई तुझको, कान पे उसके चार लगा दूँ

Tags:    
स्पेशल कवरेज न्यूज़ से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें न्यूज़ ऐप और फेसबुक पर ज्वॉइन करें, ट्विटर, Telegram पर फॉलो करे...
Next Story
Share it