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किस बात को लेकर भडके ज्योतिरादित्य सिंधिया!

 Special Coverage News |  27 July 2019 7:10 AM GMT  |  भोपाल

किस बात को लेकर भडके ज्योतिरादित्य सिंधिया!

भोपाल: कांग्रेस नेता और गुना के पूर्व सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया शुक्रवार को लुटियन दिल्ली में सरकारी बंगले पर विवाद पर भड़क उठे और उन्होंने कहा कि वह इस बंगले को पहले ही खाली कर चुके हैं, उनके बारे में इस तरह की भ्रामक ख़बरें प्रचारित करना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। वे हमेशा नियम-कानून का पालन करने वाले नागरिक रहे है।

दरअसल, सिंधिया ने उस रिपोर्ट को खारिज कर दिया है जिसमें गया था कि उन्होंने दिल्ली में बंगले का आंवटन बरकार रखने के लिए केंद्र सरकार से अनुरोध किया है। जिस पर सिंधिया का कहना है कि सरकार द्वारा जारी किए गए कागजात में कुछ बकाया नहीं होने संबंधी प्रमाण-पत्र ये साबित करते हैं कि मैंने बंगला खाली कर दिया है।मैं हमेशा नियम-कानून का पालन करने वाला जिम्मेदार नागरिक हूं मेरे बारे में इस तरह की भ्रामक ख़बरें प्रचारित करना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है।

सिंधिया ने कहा कि 23 मई को आए जनादेश को पूरी विनम्रता से स्वीकार करते हुए मैंने सरकार द्वारा प्रदत्त बंगले को खाली करने की प्रक्रिया शुरू करी। मेरा कभी भी किसी जगह पर अनाधिकृत रूप से रहने का इरादा नहीं रहा। मेरे द्वारा ऐसा कोई भी अनुरोध किए जाने की ख़बरें पूर्ण रूप से भ्रामक हैं।सरकार द्वारा जारी किया गए No-Dues प्रमाण-पत्र ये साबित करता है कि मैंने बंगला खाली कर दिया है। मैं सदैव से नियम-कानून से बंधा और उनका पालन करने वाला जिम्मेदार नागरिक रहा हूं। मेरे बारे में इस तरह की भ्रामक ख़बरें प्रचारित करना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है।

क्या कहता है नियम

नियमों के अनुसार लोकसभा भंग होने के 1 महीने के भीतर हारे हुए सांसदों को अपना बंगला खाली करना होता है। 16वीं लोकसभा 25 मई को ही भंग हो गई थी। संसद सचिवालय ने चुनाव के नतीजे आने के कुछ दिन बाद ही खाली बंगले की सूची जारी कर दी थी।

पिता के निधन के बाद आंवटित हुआ था बंगला

बता दे कि 2002 से 2019 के बीच मध्य प्रदेश के गुना से लोकसभा सदस्य रहे सिंधिया के नाम पर 27, सफदरजंग रोड स्थित बंगला आवंटित था, लेकिन 2019 के आम चुनाव में वह हार गए। पिता माधवराव सिंधिया के निधन के बाद उन्हें यह बंगला आवंटित किया गया था।उनकी असमय मृत्यु के बाद जब ज्योतिरादित्य चुनाव जीतकर संसद पहुंचे तो सरकार ने उन्हें यह बंगला आवंटित कर दिया। इस बंगले से ज्योतिरादित्य की काफी यादें जुड़ी हुई हैं, क्योंकि उनका लंबा समय यहां बीता है।

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