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बीजेपी आरएसएस को बड़ा झटका, नागपुर जिला परिषद में कांग्रेस की बड़ी जीत

 Shiv Kumar Mishra |  8 Jan 2020 12:13 PM GMT  |  नागपुर

बीजेपी आरएसएस को बड़ा झटका, नागपुर जिला परिषद में कांग्रेस की बड़ी जीत
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नागपुर. भारतीय जनता पार्टी और आरएसएस का गढ़ कहलाने वाले नागपुर में भाजपा को बड़ा झटका लगा है। जिला परिषद चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को बेदखल करके कांग्रेस सत्ता में काबिज होने जा रही है। अब तक के परिणामों में 58 में से 31 सीटें कांग्रेस के खाते में आ चुकी हैं। वहीं भाजपा के पास सिर्फ 14 सीटें आईं हैं। नागपुर में ही आरएसएस का मुख्यालय है। पूर्व सीएम देवेंद्र फडणवीस, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और पूर्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले का गृह क्षेत्र नागपुर ही है। यहां भाजपा की हुई हार तीनों बड़े नेताओं के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।

गडकरी के गांव में हारा भाजपा उम्मीदवार

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के गांव धापेवाड़ा से कांग्रेस के महेंद्र डोंगरे विजयी हुए है। वही बावनकुले के कोराडी जिला परिषद सर्कल में कांग्रेस के उमेदवार नाना कंभाले विजयी हुए है। नाना कंभाले को 8223 वोट मिले और भाजपा प्रत्याशी संजय मैन्द को 6923 वोट मिले। नागपुर की हिंगना से पूर्व मंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस के नेता रमेश बंग के बेटे दिनेश बंग विजयी हुए है। येनवा से शेकाप के समीर उमप विजयी हुए हैं। आरोली- कोदामेड़ी से कांग्रेस के योगेश देशमुख, गोधनी से कांग्रेस की ज्योति राऊत, पथरई -वडंबा से कांग्रेस पार्टी की ज्येष्ठ सदस्य शांता कुमरे तीसरी बार विजयी हुए हैं।

गृहमंत्री अनिल देशमुख का बेटा चुनाव जीता

महाराष्ट्र के गृहमंत्री अनिल देशमुख के बेटे सलील देशमुख ने नागपुर जिले में मंतपजरा जिला परिषद सीट से जीत हासिल की है। येरखेड़ा सर्कल से भाजपा के उमेदवार मोहन माकडे 158 वोटों से विजयी हुए। वहीं भीलगांव पंचायत समिति सर्कल से भाजपा के उमेश रड़के विजयी, कवठा पंचायत समिति सर्कल में कांग्रेस की उमेदवार दिशा चनकापुरे 345 वोटो से जीते हैं। कोराडी पंचायत समिति सर्कल से भाजपा की सविता जिचकार, कारगांव क्षेत्र से कांग्रेस के उमेदवार शंकर डडमल जीते हैं। वहीं बड़ेगांव, बडगॉव,वाकोडी जिला परिषद् सीट कांग्रेस ने जीती है।

शिवसेना ने नहीं किया था कांग्रेस-राकांपा से गठबंधन

वर्तमान में भले ही भाजपा को सत्ता से बेदखल करने के लिए शिवसेना,एनसीपी व कांग्रेस पक्ष की गठबंधन सरकार बन गई। लेकिन, समन्वय के अभाव में नागपुर जिला परिषद चुनाव के लिए एनसीपी-कांग्रेस मिलकर तो शिवसेना और भाजपा अलग अलग चुनावी लड़े थे। इससे पहले जिला परिषद में भाजपा का कब्जा था, उन्हें सत्ता से दूर रखने के लिए मंत्री नितिन राऊत, अनिल देशमुख, सुनील केदार पर कांग्रेस-राकांपा ने बड़ी जिम्मेदारी सौंपी थी।

भाजपा की हार के कारण

राजनीतिक जानकारों की माने तो अपने गढ़ में भाजपा की हार की सबसे बड़ी वजह राकांपा-कांग्रेस का गठबंधन और शिवसेना का अलग से चुनाव लड़ान है। शिवसेना ने सबसे ज्यादा भाजपा के वोटबैंक में चोट पहुंचाई है। इससे पहले शिवसेना-भाजपा साथ मिलकर चुनाव लड़ें थे।

कांग्रेस-राकांपा ने जिला परिषद पर कब्जे के लिए तीन मंत्रियों को मैदान में उतारा था, जिनमें मंत्री नितिन राऊत, अनिल देशमुख, सुनील केदार शामिल थे। शपथ ग्रहण के बाद से ये लगातार इस इलाके में सक्रिय थे।भाजपा नेता फडणवीस, गडकरी अति आत्मविश्वास के कारण क्षेत्र में नहीं गए।


जिला परिषद बीजेपी कांग्रेस शिवसेना राकापा अन्य
नागपुर 14311102


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