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महाराष्ट्र में बीजेपी हुई पस्त, कहा नहीं करेंगे अकेले दम पर सरकार बनाने का दावा पेश

 Special Coverage News |  5 Nov 2019 10:19 AM GMT  |  महाराष्ट्र

महाराष्ट्र में बीजेपी हुई पस्त, कहा नहीं करेंगे अकेले दम पर सरकार बनाने का दावा पेश
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मुंबई: महाराष्‍ट्र विधानसभा चुनाव (Maharashtra Assembly Elections 2019) के बाद शिवसेना के साथ जारी गतिरोध के बीच सोमवार को अमित शाह से मुलाकात के बाद मुख्‍यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पार्टी के कोर कमेटी के नेताओं के साथ बैठक कर रहे हैं. इसमें फडणवीस के अलावा, चंद्रकांत पाटिल, सुधीर मुनगंटीवार, गिरीश महाजन, पंकजा मुंडे और वी सतीश मौजूद हैं. सूत्रों के मुताबिक बीजेपी अल्पमत में अकेले सरकार बनाने का पहले दावा पेश नहीं करेगी. बीजेपी सूत्रों के मुताबिक बीजेपी शिवसेना के समर्थन देने पर स्थिति स्पष्ट होने तक खुद दावा नहीं ठोकेगी. महाराष्ट्र बीजेपी को शिवसेना के कदम पर नजर रखने और देखो और प्रतीक्षा करो की रणनीति अपनाने की बीजेपी आलाकमान से ताकीद की गई है.

सूत्रों के अनुसार बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह महाराष्ट्र में सीएम और गृहमंत्री की कुर्सी को छोड़कर बाकी पदों फर फिफ्टी-फिफ्टी के फॉर्मूले पर शिवसेना से बातचीत के पक्षधर हैं. शिवसेना को 18 मंत्री पद देने की बीजेपी तैयारी कर रही है.

इस बीच बीजेपी नेताओं के करीबी और शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे के सलाहकार किशोर तिवारी ने इस सिलसिले में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत को पत्र लिखकर दखल देने की मांग की है. बेहद प्राथमिकता वाले इस पत्र में तिवारी ने संघ प्रमुख से आग्रह किया है कि वे सरकार गठन को लेकर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से मध्यस्थता कराएं ताकि बीजेपी और शिवसेना के बीच जारी विवाद का आम सहमति से हल निकल सके.

शिवसेना को मलाल

वैसे शिवसेना की अब तक औपचारिक तौर पर बीजेपी से सरकार गठन को लेकर बातचीत नहीं हुई है. सूत्रों के मुताबिक सीएम पद के बंटवारे के साथ-साथ शिवसेना इस बात से भी नाराज़ है कि अभी तक बीजेपी के किसी भी बड़े नेता का आदित्य ठाकरे की जीत पर बधाई के लिए फोन तक नहीं आया. सीएम ने नतीजे वाले दिन भी सिर्फ प्रेस कॉन्फ्रेंस की टाइमिंग के बदलाव पर बात की थी. शिवसेना को उम्मीद थी कि ठाकरे परिवार के पहले व्यक्ति के चुनाव जीतने के बाद गठबंधन के नेता बधाई देंगे लेकिन ऐसा नहीं हुआ.

शिवसेना को मलाल है कि जब पीएम मोदी और अमित शाह का नामांकन था तब उद्धव ठाकरे खुद नामांकन के समय पहुंचे थे. इसके बावजूद बीजेपी का ये व्यवहार शिवसेना को नागवार लग रहा है. सूत्रों के मुताबिक एक तरफ जहां बीजेपी का ऐसा व्यवहार था तो दूसरी तरफ पवार परिवार की तरफ से आदित्य की जीत पर बधाई दी गई थी.

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