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'सामना' के जरिए शिवसेना ने देवेंद्र फडणवीस पर फिर साधा निशाना, 80 दिन नहीं, पूरे पांच साल चलेगी सरकार

 Special Coverage News |  15 Dec 2019 4:56 AM GMT  |  मुम्बई

सामना के जरिए शिवसेना ने देवेंद्र फडणवीस पर फिर साधा निशाना, 80 दिन नहीं, पूरे पांच साल चलेगी सरकार
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मुंबई: शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना के जरिए एक बार फिर पूर्व मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस पर निशाना साधा है. संपादकीय में लिखा है, ''जिन्होंने 80 घंटों की सरकार बनाई, उन्हें आज भी लगता है कि उद्धव ठाकरे की सरकार 80 दिन नहीं टिकेगी. इस भ्रम से अब सभी को बाहर आना चाहिए. सरकार नागपुर पहुंच गई है. मुंबई में आकर पूरा मंत्रिमंडल बनेगा और उसके बाद पांच साल टिकेगा. सरकार को बरकरार रखने में अजीत पवार की भूमिका महत्वपूर्ण होगी, चिंता नहीं होनी चाहिए.

महाराष्ट्र की राजनीति का दूरगामी परिणाम देश की राजनीति पर होगा, ऐसा माहौल है....''

सामना ने आगे लिखा... "सोमवार से विधानसभा का नागपुर अधिवेशन शुरू होगा. कई बार अधिवेशन एक-दो सप्ताह ही चलता है लेकिन इसके लिए पूरी सरकार लाव-लश्कर लेकर नागपुर पहुंचती है और वे वहां बहुत बार रात की रंगीन पार्टियों के हुड़दंग में मग्न रहते हैं. नए मुख्यमंत्री श्री उद्धव ठाकरे ऐसे वातावरण में बहुत ज्यादा नहीं रमेंगे. 80 घंटों की सरकार जिन्होंने लाई और गिर गए, उन्हें ऐसा लगता है कि यह सरकार 80 दिन भी नहीं टिकेगी. नागपुर अधिवेशन राजनैतिक घोड़ाबाजार के लिए प्रसिद्ध है परंतु 170 सदस्यों के मजबूत बहुमतवाली ये सरकार पांच साल टिकेगी. श्री शरद पवार व कांग्रेस के नेताओं की यह भूमिका है. मंत्रिमंडल का विस्तार नागपुर अधिवेशन के बाद होगा और यह राज्य तेजी से आगे बढ़ेगा. महाराष्ट्र में जो हुआ वह अनपेक्षित था. ऐसा हुआ है इस पर आज भी कई लोगों को विश्वास नहीं होता.''

''... 10 दिसंबर की रात मैं लखनऊ के एक कार्यक्रम में गया था. अन्य पार्टियों से भाजपा में गए और आज मंत्रिपद पर विराजमान प्रमुख नेता मिल गए. सभी का एक ही कहना था महाराष्ट्र ने नई दिशा दी. देश के अन्य राज्यों में भी अब यही होगा. यह शुरुआत है. विदर्भ में सत्कारनागपुर में 'रामगिरी' इस अधिकृत निवासस्थान पर मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ठहरेंगे. अधिवेशन के पहले ही दिन नए मुख्यमंत्री का सार्वजनिक सत्कार नागपुर में हो रहा है. मुख्यमंत्री की हैसियत से श्री उद्धव ठाकरे द्वारा लिया गया पहला प्रमुख निर्णय मतलब समृद्धि महामार्ग को शिवसेनाप्रमुख बालासाहेब ठाकरे का नाम देना. यह महामार्ग विदर्भ को शेष महाराष्ट्र से जोड़नेवाला है. किसानों ने अपनी जमीन देने का विरोध किया परंतु उस विभाग के मंत्री रहे श्री एकनाथ शिंदे ने किसानों और सरकार के बीच मध्यस्थता की और यह महामार्ग आगे बढ़ा, ये सच्चाई है.

''...मुंबई में आरे कारशेड को स्थगति दे दी गई. किसी को भी नहीं चाहिए ऐसी बुलेट ट्रेन परियोजना भी आगे बढ़ेगी, ऐसा दिखाई नहीं देता. मुंबईकरों को मेट्रो चाहिए लेकिन इसके लिए 'आरे' के जंगलों के कत्ल के विरोध में लोग सड़क पर उतरे. बुलेट ट्रेन निश्चित तौर पर किसके लिए? यह शंका आज भी है ही. इन तमाम महंगी परियोजनाओं की बजाय भूमिपुत्रों, किसानों की रोजी-रोटी की समस्या सुलझे, ऐसी सभी की अपेक्षा है. पहले की सरकार ने राज्य और सत्ता का इस्तेमाल लोगों के लिए कम तथा पार्टी के विस्तार के लिए ज्यादा किया. परंतु एकनाथ खडसे, पंकजा मुंडे जैसे पार्टी के 'बहुजन' चेहरे ही नाराज हैं तथा चुनाव में उन्हें पराजित करने के लिए पार्टी के अंदर से ही प्रयत्न किया गया, ऐसा आरोप दोनों ने लगाया है.

''...एकनाथ खडसे चार दिन पहले भाजपा के नेताओं से मिलने के लिए दिल्ली गए थे. परंतु खडसे सीधे शरद पवार को जाकर मिले. खडसे दिल्ली से मुंबई पहुंचे तथा उसी दिन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे से मिले. वर्ष 2014 में 'युति' के टूटने की घोषणा करनेवाले खडसे अब मन से भाजपा से टूट गए हैं. वे भाजपा में रहेंगे, ऐसा माहौल आज नहीं है. पंकजा मुंडे ने गोपीनाथ मुंडे के जन्मदिन पर भगवानगढ़ आने का निमंत्रण उद्धव ठाकरे को ही दिया. मैं भाजपा में ही हूं, ऐसा पंकजा को बार-बार घोषित करना पड़ता है. भाजपा के कुछ विधायक जो मूलत: कांग्रेस और राष्ट्रवादी के हैं वे मूल पार्टी में वापस जाएंगे, ऐसी खबर दिल्ली के प्रमुख अखबार में छपी. ये सब महाराष्ट्र में सत्तांतरण के बाद हो रहा है.

अजीत पवार का क्या?

''मुख्यमंत्री व छह मंत्री मिलकर राज्य का काम-काज कर रहे हैं. नागपुर अधिवेशन के बाद पूरे मंत्रिमंडल का विस्तार होगा. भारतीय जनता पार्टी और शिवसेना में 25-30 वर्षों से जैसा नहीं था, ऐसा उत्तम संवाद सरकार में शामिल तीन पार्टियों में दिख रहा है. आघाड़ी की सरकार चलाना एक कला है और ऐसी सरकार चलानेवाले प्रमुख नेताओं का मन उदार होना चाहिए. उद्धव ठाकरे और शरद पवार के पास यह उदारता मुझे पहले दिन से ही दिख रही है. अवरोध व छीना-झपटी की नीति नहीं दिखाई देती है, यह महत्वपूर्ण है. अजीत पवार की भूमिका को लेकर सबसे बड़ा सवाल है. 80 घंटे की सरकार जिन्होंने फडणवीस के साथ स्थापित की, वे अजीत पवार क्या करेंगे? भाजपा की तमाम आशाएं आज भी अजीत पवार पर ही टिकी हुई हैं. संसद के मध्यवर्ती सभागृह में अजीत पवार की भूमिका के विषय में मैंने शरद पवार से पूछा, 'अजीत पवार का क्या?' पवार विश्वास के साथ बोले, 'अजीत पवार की चिंता मत करो. यह सरकार पांच साल वे ही टिकाएंगे. निश्चिंत रहो!' शरद पवार निश्चिंत हैं तब तक सरकार स्थिर है. महाराष्ट्र निश्चिंत है. यह सरकार बरकरार रखनी ही है. इस एक प्रण के साथ शरद पवार खड़े हैं. फिक्र नहीं होनी चाहिए!''

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