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शिवसेना को अब क्यों याद आये आडवाणी?

शिवसेना को अब क्यों याद आये आडवाणी?
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बीते तीन दशकों से बीजेपी के साथ एनडीए का हिस्सा रही शिवसेना ने आडवाणी युग का जिक्र कर रहा है कि अब वह बात नहीं रही। शिवसेना के सांसद संजय राउत ने शनिवार को बीजेपी से अलगाव पर सवालों का जवाब देते हुए कहा कि नए और पुराने एनडीए में बड़ा अंतर है।

उन्होंने कहा, आज एनडीए का संयोजक कौन है? एनडीए कौन चला रहा है और अब इसके लिए नए मालिक कौन हैं? आडवाणी जी जो इसके संस्थापक थे, वे या तो बाहर हैं या फिर अब निष्क्रिय हैं।

बता दें कि 2009 के लोकसभा और विधानसभा चुनाव तक महाराष्ट्र में शिवसेना बीजेपी के मुकाबले सीनियर पार्टनर थी। यह दौर वह था, जब लालकृष्ण आडवाणी बीजेपी के एक तरह से सर्वेसर्वा थे और 2009 में पीएम कैंडिडेट भी थे। शिवसेना ने इस दौर तक हमेशा बीजेपी से ज्यादा सीटों पर ही चुनाव लड़ा था।

फिर 2013 में नरेंद्र मोदी को पीएम उम्मीदवार घोषित किया गया। बीजेपी महाराष्ट्र में आक्रामक हुई और शिवसेना से ज्यादा सीटों की मांग की। इसी पर दोनों दलों में बात नहीं बनी और दोनों ने 2014 में अलग-अलग चुनाव लड़ा। हालांकि चुनाव नतीजों के बाद फिर एक हुए और सरकार बनाई।

मतभेदों के बाद भी 2019 के लोकसभा और विधानसभा चुनाव में दोनों दलों ने साथ ही चुनाव लड़ा। लेकिन, यह पहला मौका था जब गठबंधन में बीजेपी ने शिवसेना से ज्यादा सीटों पर लड़ा। हालांकि चुनाव नतीजों के बाद शिवसेना ढाई-ढाई साल के सीएम को लेकर अड़ गई और लंबी चली खींचतान के बाद आखिर में राह अलग कर ली।

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