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10 साल बाद भारतीय सेना को मिलेंगा बुलेट प्रूफ जैकेट

 Special News Coverage |  31 March 2016 10:42 AM GMT

10 साल बाद भारतीय सेना को मिलेंगा बुलेट प्रूफ जैकेट
नई दिल्ली: देश की रक्षा में दिन-रात मुस्तैद रहने वाले सेना के जवानों को बुलटे प्रूफ जैकेट का दशकों पुराना इंतजार जल्द ही खत्म होने जा रहा है। 10 साल के लंबे इंतजार के बाद अब सेना के जवानों को 50,000 जैकेट उपलब्ध कराई जा रही हैं, जबकि जरूरत साढ़े तीन लाख बुलेटप्रूफ जैकेटों की है।

भारतीय सेना ने टाटा समूह के टाटा अडवांस मटीरियल लिमिटेड को 50 हजार बुलेट प्रूफ जैकेट बनाने का ऑर्डर दिया है। 140 करोड़ की लागत से इन जैकेटों का निर्माण किया जाएगा। रक्षा मंत्रालय से जुड़े सूत्र ने बताया कि इसी साल अगस्त से जैकेटों की डिलीवरी शुरू हो जाएगी जबकि जनवरी 2017 तक सभी जैकेटों की डिलिवरी हो जाएगी।


10 लाख से अधिक संख्या बल वाली सेना के आधुनिकीकरण की जरूरत को ध्यान में रखकर नवंबर 2014 में मनोहर पर्रिकर ने रक्षा मंत्री का पद संभालने के साथ ही जैकेटों के लिए व्यवस्था के निर्देश दिए थे। पर्रिकर ने आपात अंतरिम खरीद के लिए अनुमति दी थी। अक्टूबर 2015 में छह वेंडरों द्वारा बनाए 1.86 लाख मॉड्यूलर जैकेट को फील्ड परीक्षण में अनुपयुक्त करार दिया गया था।

कम वजन वाली नई जैकेट से सैनिकों का सिर, गर्दन, सीना और पैर भी ढके रहेंगे। इसके साथ ही इन जैकेट से सैनिकों को मुश्किल क्षेत्रों में ऑपरेशन के दौरान एक जगह से दूसरी जगह जाने में काफी मदद मिलेगी। बता दें कि सेना की कुल 3,53,765 नए जैकेटों की जरूरत के लिहाज से 50 हजार जैकेटों की आपूर्ति काफी कम है। 50000 बुलेटप्रूफ जैकेटों की तत्काल आधार पर खरीद का फैसला इसलिए लेना पड़ा।

सेना की कुल जरूरतों को पूरा करने के लिए 1.86 लाख बुलेटप्रूफ जैकेटों का ऑर्डर साल 2012 में किया गया था। वहीं 1.67 जैकेटों की आपूर्ति के लिए 2017 तक का समय निर्धारित किया गया था। हालांकि अभी तक इनकी खरीद हकीकत में नहीं हो पाई है। फिलहाल जवानों को भारी बुलेटप्रूफ जैकेट से ही काम चलाना पड़ रहा है और इनकी गुणवत्ता बड़े ऑपरेशनों के लिहाज से काफी कम है।

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