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गतिमान एक्सप्रेस के बाद अब जून में दौड़ेगी टेलगो की 200 KMPH वाली ट्रेनें

 Special News Coverage |  17 April 2016 1:13 PM GMT

गतिमान एक्सप्रेस के बाद अब जून में दौड़ेगी टेलगो की 200 KMPH वाली ट्रेनें

नई दिल्ली: देश की पहली सेमी हाईस्पीड ट्रेन 'गतिमान एक्सप्रेस' शुरू होने के बाद अब भारतीय रेलवे ट्रैकों पर जल्द ही सबसे तेज दौड़ने वाली ट्रेनों का ट्रायल शुरू हो जाएगा। इसके लिए स्पेन से टेलगो ट्रेन कोच मंगवाए जा रहे हैं जो 23 अप्रैल तक देश पहुंच जाएंगे। यह ट्रेन करीब 200 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से दौड़ेगी। जून में पलवल-मथुरा रूट पर ट्रायल रन होगा। गतिमान एक्सप्रेस के लिए अपग्रेड हुए निजामुद्दीन-आगरा ट्रैक पर ही नए कोच चलाए जा सकेंगे। बाद में इन्हें दिल्ली-मुंबई रूट पर चलाया जाएगा।


इस ट्रेन की गति हाल में दिल्ली और आगरा के बीच शुरू की गई भारत में सबसे तेज चलने वाली गतिमान एक्सप्रेस से ज्यादा है। लेकिन अगर यह टेलगो ट्रेन ट्रायल में पास हो जाती है, तो यह देश की सबसे तेज ट्रेन होगी। कुछ ही दिनों में बार्सिलोना से शिप में करीब 9 टेलगो कोच भारत के लिए भेजे गए हैं और कुछ ही दिनों में मुंबई के बंदरगाह पर यह उतर जाएंगे।

स्पेन की इस कंपनी ने भारत की वर्तमान पटरियों पर अपनी हल्की और तेज चलने वाली ट्रेनों को दौड़ाने के लिए प्रयास स्वरूप इजाजत दी है। इस काम के लिए कंपनी को कोई पैसा नहीं दिया जाएगा। बताया जा रहा है कि मुंबई में बंदरगाह पर उतरने के बाद इस ट्रेन को इज्जतनगर डिपो पर भेजा जाएगा जहां से जून में इन्हें पटरियों पर दौड़ाने के लिए भेजा जाएगा।

पहले टेलगो ट्रेन को बरेली और मोरादाबाद के बीच दौड़ाया जाएगा। यहां पर पहले यह ट्रेन 115 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से दौड़ेगी। यहां पर ट्रेन में कंपन का ट्रायल होगा। इसके बाद इसी ट्रेन को मथुरा और पलवल के बीच 180 किलोमीटर प्रति घंट का रफ्तार से दौड़ाया जाएगा। यह भी ट्रायल रन होगा। इस ट्रेन का तीसरा टेस्ट मुंबई से दिल्ली के बीच होगा जहां पर यह ट्रेन अपने पूर्ण प्रदर्शन यानी 200 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से दौड़ेगी।

बता दें कि रेलवे को ट्रेनों को 160 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से दौड़ाने के लिए भी अपने सिग्नालिंग सिस्टम को काफी सुधारना पड़ा था और साथ ही पटरियों को भी इसी हिसाब से तैयार करना पड़ा था। रेल अधिकारियों का दावा है कि टेलगो ट्रेन को भारतीय पटरियों पर दौड़ाने के लिए भारतीय पटरियों में ज्यादा बदलाव की जरूरत नहीं है।

अधिकारियों का यह भी कहना है कि टेलगो को भारत में पहुंचाने में जो भी खर्चा आएगा, यहां तक कि कस्टम के चार्ज भी कंपनी ही चुकाएगी। कहा जाता है कि यह ट्रैन हल्की होने की वजह से कम बिजली की खपत करती है और इससे रेलवे को बिजली के बिलों में काफी राहत मिल सकती है।

आपको बता दें टेलगो के एक कोच पर करीब 3.25 करोड़ रुपए खर्च होंगे। जबकि नॉर्मल कोच बनाने में केवल 2.5 करोड़ खर्च होते हैं। रेलवे के मुताबिक, ये कोच मॉर्डन टेक्नोलॉजी से बने होंगे। मेट्रो के कोच की तरह ही इसमें ऑटोमैटिक स्लाइडिंग डोर होंगे। इस तरह के कुल बीस कोच भारत में बनाए जाएंगे। इनमें 14 एसी चेयर कार, तीन एग्जीक्यूटिव चेयर कार और 3 पावर कार होंगे।

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