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अरुण जेटली का नाराज साहित्यकारों पर निशाना, पूछा-विरोध सचमुच का है या केवल गढ़ा हुआ ?

 Special News Coverage |  15 Oct 2015 5:46 AM GMT




नई दिल्ली : दादरीकांड के मुद्दे पर वित्त मंत्री अरुण जेटली ने अपने ब्लॉग में साहित्यकारों के सम्मान वापसी के कदम की आलोचना की है। जेटली ने लिखा है कि गढ़े हुए विरोध के चलते ऐसा किया जा रहा है। दादरीकांड को निंदनीय बताते हुए वित्त मंत्री ने लिखा कि इसपर हो रहा विरोध सचमुच का है या केवल गढ़ा हुआ विरोध है? क्या यह वैचारिक असहनशीलता का मामला नहीं है।

"एक गढी हुई क्रांति-अन्य साधनों द्वारा राजनीति" शीषर्क से किए गए एक फेसबुक पोस्ट में जेटली ने लिखा, "दादरी में अल्पसंख्यक समुदाय के एक सदस्य की पीट-पीटकर की गई हत्या बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय है। सही सोच रखने वाला कोई भी इंसान न तो इस घटना को सही ठहरा सकता है और न ही इसे कम करके आंक सकता है। ऎसी घटनाएं देश की छवि खराब करती हैं।


उन्होंने कहा, "उनमें से कुछ इस मान्यता के हकदार रहे होंगे, न तो मैं उनकी अकादमिक प्रतिभा पर सवाल उठा रहा हूं और न ही मैं उनके राजनीतिक पूर्वाग्रह रखने के अधिकार पर सवाल उठा रहा हूं। उनमें से कई लेखकों ने मौजूदा प्रधानमंत्री के खिलाफ उस वक्त भी आवाज बुलंद की थी जब वह गुजरात के मुख्यमंत्री थे।

जेटली ने कहा कि लेकिन जब पिछले साल मोदी सत्ता में आए तो "पहले की सरकारों में संरक्षण का आनंद उठा रहे लोग जाहिर तौर पर मौजूदा सरकार से असहज हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के और सिमटने के कारण उनकी यह "असहजता" पहले से बढ गई है।

वित्त मंत्री ने कहा कि देश में असहनशीलता का कोई माहौल नहीं है। उन्होंने कहा, "ये जो गढी हुई बगावत है, वह दरअसल भाजपा के प्रति वैचारिक असहनशीलता का मामला है।


गौरतलब है कि दादरी कांड के बाद दर्जनों लेखकों ने अपने साहित्य अकादमी अवॉर्ड लौटा दिए हैं। उनका दावा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शासनकाल में असहनशीलता का माहौल बनाया जा रहा है।


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