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कोहिनूर वापस लाने पर केंद्र सरकार ने जताई असमर्थता, कहा - उपहार में दिया था

 Special News Coverage |  18 April 2016 9:54 AM GMT

Kohinoor Diamond


नई दिल्ली : ब्रिटेन से कोहिनूर हीरे को देश में वापस लाने पर केंद्र सरकार ने अपनी असमर्थता जताई है। सॉलिसिटर जनरल ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि भारत कोहिनूर पर दावा नहीं कर सकता, क्योंकि न तो इसे चुराया गया था और न ही बलपूर्वक ले जाया गया। सरकार ने कहा कि 1849 में कोहिनूर ईस्ट इंडिया कंपनी को महाराजा दिलीप सिंह ने बतौर उपहार दिया था।

सुनवाई के दौरान संस्कृति मंत्रालय की ओर से कोर्ट में जवाब दिया गया कि महाराजा दिलीप सिंह ने सिख युद्ध के बाद बतौर हर्जाना ईस्ट इंडिया कंपनी को कोहिनूर दिया था। कोहिनूर ऐसी चीज नहीं है जिसे भारत से चुराया गया हो।


सॉलिसिटर जनरल ने मुख्य न्यायाधीश टी.एस ठाकुर से कहा कि अगर भारत कोहिनूर को वापस मांगेगा तो दुसरे मुल्कों की जो चीज़ें भारत के संग्रहालयों में हैं उन पर भी विदेशों से दावा किया जा सकता है। इस पर अदालत ने कहा की हिन्दुस्तान ने तो कभी भी कोई उपनिवेश नहीं बनाया न दुसरे की चीज़ें अपने यहां छीन कर रखी। अदालत ने कहा कि जैसे टीपू सुल्तान की तलवार वापस आई, हो सकता है आगे भी ऐसा ही हो।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम चाहे तो इस याचिका को खारिज कर सकते हैं, मगर हम ऐसा नहीं करेंगे। हम याचिका को इसलिए खारिज नहीं कर रहे, क्‍योंकि कल को दूसरे मुल्‍कों के समक्ष अगर इस संबंध में अपील की जाती है तो उन्‍हें यह कहने का मौका न मिल जाए कि आपकी मांग को तो आपके देश की सर्वोच्‍च अदालत ही खारिज कर चुकी है। लिहाजा, आप छह सप्‍ताह के भीतर एक हलफनामा दायर कर यह बताएं कि कोहिनूर को भारत वापस लाने के लिए अभी तक भारत सरकार की ओर से क्‍या प्रयास किए गए हैं और क्‍या कुछ किया जा सकता है।

वहीं सरकार के इस रुख पर दिल्ली के पर्यटन मंत्री कपिल मिश्रा ने सरकार पर निशाना साधा है। कपिल ने ट्वीट किया कि सरकार अपना बयान वापस ले।

'आप' ने कहा, केंद्र सरकार अपना बयान वापस ले








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