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पूर्व मंत्री का खुलासा: कांग्रेस ने रची थी मुलायम सरकार गिराने की साजिश

 Special News Coverage |  15 April 2016 9:04 AM GMT

पूर्व मंत्री का खुलासा: कांग्रेस ने रची थी मुलायम सरकार गिराने की साजिश

नई दिल्ली: ऐसे वक्त में जब कांग्रेस उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लगाए जाने को लेकर भारतीय जनता पार्टी के गठबंधन वाली केंद्र सरकार पर लगातार हमले कर रही है, वहीं नेहरु-गांधी परिवार के नजदीकी और यूपीए-1 सरकार के दौरान केन्द्रीय कानून मंत्री रहे हंसराज भारद्वाज ने चौंकाने वाला खुलासा किया है। उन्होंने कहा है कि साल 2007 में कांग्रेस ने रची थी मुलायम सरकार गिराने की साजिश, लेकिन उन्होंने इसका विरोध किया था। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने भी आर्टिकल 356 का दुरुपयोग किया है।


एक अंग्रेजी अखबार से बात करते हुए पूर्व कानून मंत्री हंसराज भारद्वाज ने कहा कि वर्ष 2007 में भ्रष्टाचार मामले में कांग्रेस नेतृत्व उत्तर प्रदेश की तत्कालीन मुलायम सिंह सरकार को बर्खास्त करना चाहता था लेकिन वह इस पर सहमत नहीं हुए थे। वह कई मुद्दों जैसे 2जी आवंटन और उप्र में कांग्रेस की लाइन पर नहीं चलना चाहते थे इसलिए उन्हें छोड़ दिया गया। आपको बता दें कि यूपीए-2 में भारद्वाज को मनमोहन कैबिनेट में शामिल नहीं किया गया था और उन्हें कर्नाटक का राज्यपाल बना दिया गया था।

गांधी-नेहरू परिवार के करीबी रहे भारद्वाज कांग्रेस द्वारा एकओर कर दिए जाने से खफा हैं। कर्नाटक से लौटने के बाद उन्हें पार्टी ने कोई नई जिम्मेदारी भी नहीं दी है। वह इन दिनों खुद को कांग्रेसी कहलाना भी पसन्द नहीं करते। उन्होंने कहा कि अरुणाचल और उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लगाने की वजह कांग्रेस में विद्रोह का होना था।

बीजेपी सरकार पर कांग्रेस द्वारा आर्टिकल 356 का गलत इस्तेमाल पर भारद्वाज ने कहा कि अरुणाचल और उत्तराखंड में राष्ट्रपति इस वजह से लगा क्योंकि वहां कांग्रेस में फूट पड़ी। उन्होंने कहा, 'एक बार जब मुख्यमंत्री अल्पमत में चला जाता है तो उसे बहुमत सिद्ध करना पड़ता है, लेकिन इस बीच, स्पीकर ने उन विधयाकों को अयोग्य घोषित कर दिया जिन्होंने सरकार के खिलाफ बगावत की। इसी वजह से फ्लोर टेस्ट नहीं हो पाया। यही हुआ है, इसमें राज्यपाल क्या कर सकता है। राज्यपाल तो जो वस्तुस्थिति होगी उसकी रिपोर्ट देगा।'

पूर्व कानून मंत्री हंसराज भारद्वाज ने कहा कि कांग्रेस ने भी कई बार आर्टिकल 356 का दुरूपयोग किया है। चाहे वह बिहार में 23 मई 2005 की अर्धरात्रि में लगाया गया राष्ट्रपति शासन ही क्यों न हो। आपको मालुम होगा यह मामला सुप्रीम कोर्ट भी पहुंचा था जहां विधानसभा भंग किये जाने को असंवैधानिक करार दिया गया था।

पूर्व मंत्री हंसराज भारद्वाज ने कहा यूपीए-1 कांग्रेस नेतृत्व वाली सरकार चाहती थी कि मुलायम सरकार को भी बर्खास्त कर दिया जाए। उन्होंने कहा, 'मुलायम के ऊपर लगातार भ्रष्टाचार को लेकर सरकार भंग करने का दबाव बनाया जा रहा था। मैंने यूपीए-1 सरकार को सलाह दिया कि मुलायम सरकार को सिर्फ करप्शन के आरोपों को आधार बनाकर नहीं गिराया जाना चाहिए। जब तक सरकार बहुमत में है, उन्हें सदन के फ्लोर पर चुनौती देनी चाहिए। लेकिन इसके लिए कांग्रेस तैयार नहीं हुई और विवाद खड़ा हो गया।'

'कांग्रेस का कोर ग्रुप चाहता था मुलायम सरकार को बर्खास्त कर दिया जाए, लेकिन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह दुविधा में थे। अन्य सदस्यों का भी यह मत था कि राष्ट्रपति शासन लगा दिया जाना चाहिए लेकिन मैंने इसका खुले तौर पर विरोध किया।' इस मसले पर प्रधानमंत्री ने उनकी बात मानी कि उत्तर प्रदेश में मुलायम सरकार गिराने का कोई औचित्य नहीं है। यूपी के राज्यपाल को भी हटाने का प्लान था।

भारद्वाज ने कहा कि उन्होंने साफ कहा कि यूपी के राज्यपाल को भी नहीं हटाया जा सकता। उन्होंने कहा कि आज भी वो अपनी इस बात कायम हैं कि सिर्फ भ्रष्टाचार के आरोप में किसी सरकार को नहीं गिराया जा सकता। हंस राज भारद्वाज ने कहा कि वो कांग्रेस से कई मामलों में असहमत हो जाते थे।

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