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इशरत जहां मामला : चिदंबरम को रिजिजू ने बताया राष्ट्रविरोधी

 Special News Coverage |  19 April 2016 11:03 AM GMT

इशरत जहां मामला : चिदंबरम को रिजिजू ने बताया राष्ट्रविरोधी

नई दिल्ली: इशरत जहां मामले में गृह राज्यमंत्री किरण रिजिजु ने चिदंबरम को राष्ट्रविरोधी करार दिया है। इशरत जहां को आतंकी बताने वाले पहले हलफनामे को बतौर खुद गृहमंत्री पी. चिदंबरम ने दस्तखत किए थे। जो चिदंबरम के लिए बड़ी मुसीबत बन गया है। जबकि चिदंबरम सार्वजनिक रूप से पहले हलफनामे के पीछे निचले स्तर के अधिकारियों का हाथ बताते रहे हैं।

हैरानी है कि इशरत जहां से संबंधित फाइल के 28 पेज गायब हैं। तकरीबन 70 पन्नों वाली इशरत केस की फाइल में सरकारी नोटिंग्स, दस्तखत, कानूनी दस्तावेज, और कई अटैचमेंट्स हैं, जिन्हें पहले कभी सार्वजनिक नहीं किया गया था।


इशरत जहां को आतंकी बताने व लश्कर के आत्मघाती दस्ते का सदस्य होने का दावा करने वाले हलफनामे को खुद चिदंबरम ने 29 जुलाई 2009 को हरी झंडी दी थी। लेकिन एक महीने के भीतर उन्होंने नया हलफनामा दाखिल करने का आदेश दे दिया।

इसका राज इशरत की फाइल के उन 28 पन्नों में छुपा है, जो गायब हैं। बताया जाता है कि इन पन्नों में हलफनामे में बदलाव से पहले और बदलाव के बाद वाले अंश का सरकारी ब्योरा था। रिजिजू ने कहा, 'चिदंबरम ने अपना फर्ज अदा नहीं किया। इशरत की सूचनाओं को उन्होंने नजरअंदाज किया। अब वह रंगे हाथ पकड़े गए हैं बच नहीं सकते।

चिदंबरम ने आरोपों से पल्ला झाड़ते हुए कहा है कि वह इस पर कोई टिप्पणी नहीं करेंगे जब तक कि वह फाइलें और उनकी नोटिंग न देख लें। उन्होंने अपनी सफाई में कहा कि दूसरा हलफनामा गृह सचिव और अटर्नी जनरल की सलाह से ही दायर किया गया था।

उन्होंने कहा कि आइबी ने खुफिया जानकारियां भी दी थीं। फिर भी एक व्यक्ति आतंकी है या नहीं कानूनी अदालत में सुबूतों के आधार पर तय होना चाहिए। मुख्य मुद्दा तो यह है कि अगर कोई संदिग्ध आतंकी भी हो तो क्या उसका फर्जी एनकाउंटर करना उचित है?

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