Home > Archived > अरविंद केजरीवाल की मुश्किलें बढ़ीं, 21 विधायकों पर गिर सकती है गाज

अरविंद केजरीवाल की मुश्किलें बढ़ीं, 21 विधायकों पर गिर सकती है गाज

 Special News Coverage |  13 April 2016 6:59 AM GMT

अरविंद केजरीवाल की मुश्किलें बढ़ीं, 21 विधायकों पर गिर सकती है गाज

नई दिल्ली: अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी सरकार की मुश्किलें बढ़ सकती है। पार्टी के 21 विधायकों पर अयोग्यता की गाज गिर सकती है। इन विधायकों को बीते साल मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने संसदीय सचिव नियुक्त किया था। आपको बता दें 21 विधायकों को संसदीय सचिव नियुक्त करने का बीजेपी और अन्य पार्टियों ने विरोध किया था।

आप को बता दें इन विधायकों को अयोग्य ठहराने के लिए बीते साल जून में राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को भी याचिका दी गई थी। इसके बाद चुनाव आयोग ने विधायकों को 11 अप्रैल तक इस याचिका पर जवाब देने का समय दिया था। हालांकि संबंधित 21 विधायकों ने शुक्रवार को इस याचिका पर जवाब देने के लिए 6 से आठ हफ्ते का और समय मांगा है। इसके पीछे वजह यह दी गई है कि संसदीय सचिवों को मिलने वाली सुविधाओं और भत्तों के बारे में सरकार से जानकारी लेने के लिए और समय की जरूरत है, क्योंकि इसके लिए सरकार के अलग-अलग विभागों से जानकारी लेनी होगी।


विपक्ष का आरोप था कि इन 21 विधायकों को मंत्रियों की तरह सुविधाएं दी जाएंगी, जिससे दिल्ली की जनता पर बोझ पड़ेगा। 1993 में दिल्ली विधानसभा के दोबारा गठन के बाद से किसी भी सरकार में तीन से ज्यादा संसदीय सचिव नहीं रहे हैं।

राष्ट्रीय मुक्ति मोर्चा (आरएमएम) नाम के एनजीओ की याचिका से जुड़ा है जिसमें आम आदमी पार्टी के 21 विधायकों को संसदीय सचिव बनाने को लेकर चुनौती दी गई है। याचिका में कहा गया है कि विधायकों को अयोग्य घोषित किया जाना चाहिए क्योंकि वो एक साथ लाभ के दो पदों पर बैठे हैं। लिहाजा संसदीय सचिव के तौर पर उनकी नियुक्ति गैर कानूनी है। मामले की सुनवाई के दौरान दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र, दिल्ली सरकार और दिल्ली के उपराज्यपाल से जवाब मांगा है।

चुनाव आयोग ने विधायकों को 11 अप्रैल तक इस याचिका पर जवाब देने का समय दिया था। हालांकि संबंधित 21 विधायकों ने शुक्रवार को इस याचिका पर जवाब देने के लिए 6 से आठ हफ्ते का और समय मांगा है। इसके पीछे वजह यह दी गई है कि संसदीय सचिवों को मिलने वाली सुविधाओं और भत्तों के बारे में सरकार से जानकारी लेने के लिए और समय की जरूरत है, क्योंकि इसके लिए सरकार के अलग-अलग विभागों से जानकारी लेनी होगी।

Tags:    
स्पेशल कवरेज न्यूज़ से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें न्यूज़ ऐप और फेसबुक पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करे...
Share it
Top