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पठानकोट : नम आंखों ने दी शहीद जांबाजों को अंतिम विदाई

 Special News Coverage |  4 Jan 2016 9:09 AM GMT




Pathankot Attack

नई दिल्ली : पठानकोट आतंकी हमले में शहीद हुए एयरफोर्स के लेफ्टनेंट कर्नल ईं निरंजन कुमार और कमांडो गुरसेवक को नम आंखों से विदाई दी गई। देश के जांबाज सपूतों को आखिरी विदाई देते वक्त लोगों की आंखें गम से नम थीं तो सीना गर्व से चौड़ा...

अंबाला के गरनाला गांव में एयरफोर्स के गरुड़ कमांडो गुरसेवक सिंह को सलामी दी गई। वहीं, एनएसजी बम डिफ्यूजल स्क्वॉड के हेड लेफ्टिनेंट कर्नल निरंजन ई. कुमार का पार्थिव शरीर बेंगलुरु के बीईएल ग्राउंड पर रखा गया है।






गुरसेवक का शव जब घर पहुंचा तो पूरे गांव में ही शोक में डूब गया। हर आंख नम थी। गुरसेवक को श्रद्धांजलि देने के लिए पूरा अंबाला ही उमड़ा था। एयरफोर्स के जवानों ने हवाई फायरिंग कर गुरसेवक को सलामी दी। आपको बता दें डेढ़ महीने पहले ही गुरसेवक की शादी हुई थी। उनकी पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल है।





बेटे की सहादत पर गर्व
गुरसेवक के पिता सुच्चा सिंह ने कहा कि मुझे दुख है कि बेटा चला गया, गर्व है कि वह देश के काम आया।





वहीं, निरंजन कुमार का उनके गृहनगर केरल के पक्कड़ में अंतिम संस्कार किया गय़ा। इस दौरान उनकी पत्नी भी मौजूद थीं। निरंजन पठानकोट में मारे गए एक आतंकी के शरीर में बंधे एक्सप्लोसिव को डिफ्यूज कर रहे थे। लेकिन आतंकी के शरीर पर इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस बंधी थी। निरंजन के उसे छूते ही धमाका हो गया। बेहद जख्मी हालत में उन्हें अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उन्हें नहीं बचाया जा सका




अर्जुन था मेरा भाई
शहीद लेफ्टिनेंट कर्नल ई. निरंजन कुमार की बहन ने कहा कि उनका भाई अर्जुन था, वह कर्मभूमि में लड़ते हुए मरा। निरंजन कुमार का हंसता-खेलता परिवार था। उनके जाने से पूरा परिवार गहरे सदमे में है। पत्नी के साथ ईं निरंजन कुमार। वह अपने पीछे एक बेटी को भी छोड़ गए हैं।




तीन साल पहले यहीं उनकी शादी डॉक्टर केजी राधिका से हुई। वह सितंबर में घरवालों से मिलने आए थे। उनकी दो साल की एक बेटी है, जिसका नाम विस्मया है।

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