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पीएम की कूटनीति काम आई, कतर से 6 अरब डॉलर कम भुगतान पर मिलेगी गैस

 Special News Coverage |  1 Jan 2016 5:05 AM GMT

dhrmendr prdhan
नई दिल्ली: कतर ने भारत को दीर्घकालीन अनुबंध पर बेची जाने वाली गैस की कीमत कम करने पर सहमति जतायी है। इससे भारत को करीब 6 अरब डॉलर कम भुगतान करना होगा। साथ ही 2015 में कम उठाव को लेकर 12,000 करोड़ रुपये के जुर्माने को भी खत्म करने का फैसला किया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस के दाम में आई भारी गिरावट को देखते हुये दोनों देशों के बीच दाम कम करने पर सहमति बनी है।



देश में सबसे बड़े गैस आयातक पेट्रोनेट एलएनजी लिमिटेड (पीएलएल) और कतर के रासगैस के बीच आज यहां गैस खरीद के संशोधित अनुबंध के मौके पर पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री धमेन्द्र प्रधान ने कहा, ‘‘विश्व बाजार में ईधन की कीमतों में आई कमी का फायदा मिल रहा है।


दोनों देशों के बीच इस समझौते से हमें बहुत लाभ होगा।’’ उन्होंने कहा कि कम कीमत पर गैस देने के साथ-साथ वर्ष 2015 में अनुबंध की तुलना में कम गैस लेने से लगाई गई 12 हजार करोड़ रुपए की पेनाल्टी भी माफ करने पर रासगैस राजी हो गई है। संशोधित फार्मूला के आधार पर भारत को पहले के 12-13 डॉलर प्रति दस लाख ब्रिटिश थर्मल यूनिट (बीटीयू) की तुलना में करीब आधी कीमत छह से सात डॉलर प्रति बीटीयू पर यह गैस मिलेगी। यह फॉर्मूला एलएनजी इंडिया द्वारा रासगैस से दीर्घकालिक आधार पर हर वर्ष खरीदी जाने वाली 75 लाख टन गैस पर लागू होगा।
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यह अनुबंध अप्रैल 2028 में खत्म होगा। संशोधित फॉर्मूले का आधार ब्रेंट क्रूड की तीन माह की औसत कीमत होगा। पहले यह जापान से आयातित कच्चे तेल के पांच वर्ष की औसत कीमत पर होता था । इसकी वजह से पीएलएल सालाना दस लाख टन अतिरिक्त एलएनजी खरीदने की स्थिति में होगी ।

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