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राम मंदिर : संघ प्रमुख मोहन भागवत के बयान पर गरमाई सियासत !

 Special News Coverage |  3 Dec 2015 11:49 AM GMT

Mohan Bhagwat Nitish Kumar on Ram temple



नई दिल्ली : आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के फिर से राम मंदिर राग अलापने पर सियासत फिर गर्मा गई है। कई दिनों से ढंडा पड़ा यह मामला गुरुवार फिर गर्म हो गया जब आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत का इसे लेकर बयान आया। उनके बयान पर सियासत शुरू होने लगी है।

बिहार के मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार ने तंज कसते हुए कहा कि भाजपा राम मंदिर मुद्दे को जिंदा रखना चाहती है। भागवान राम के प्रति भाजपा नेताओं में कोई श्रद्धा नहीं है बल्कि राम के नाम पर लोगों की भावना का इस्‍तेमाल करना चाहती है।


उन्‍होंने ताना कसते हुए कहा कि आरएसएस और भाजपा से जुड़े लोग ऐसे राम के नाम का उपयोग करते हैं जैसे वो भाजपा के सदस्‍य हों। बीजेपी और आरएसएस के लोग कहते रहे हैं, 'राम लला हम आएंगे, मंदिर वहीं बनाएंगे, पर तारीख नहीं बताएंगे।

वहीं, बसपा सुप्रीमों मायावती ने भी कहा कि जब यह मामला अदालत में लंबित है। फिर भी इस तरह का बयान दिया गया है।

वहीं बाबरी मस्जिद के मुख्य पक्षकार हाशिम अंसारी ने संघ प्रमुख भगवत पर पलटवार किया है। भागवत के अयोध्या में मंदिर बनाने के बयान पर भड़के हाशिम ने उन्हें ऐसा करने की चु‌नौती दी है। अंसारी का कहना है कि छह दिसंबर को मोहन भागवत के नाम पर मातम मनाएंगे। भड़के हाशिम अंसारी ने ये कहा कि अगर दम है तो मोहन भागवत अयोध्या आएं और आकर मंदिर का निर्माण करें।

वहीं, दिल्ली में मोहन भागवत के बयान पर सपा नेता प्रो.रामगोपाल यादव ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ये लोग कई बार लोगों को मूर्ख बना चुकें हैं, अब जनता इनके झूठे नारों में नहीं आने वाली है।

मालूम हो कि संघ प्रमुख मोहन भागवत ने अपने जीवनकाल में ही राम मंदिर का निर्माण पूरा होने की आशा जताते हुए कहा था कि हो सकता है, यह श्रेष्ठ लक्ष्य मेरे अपने जीवन में ही पूरा हो और मैं इसे अपनी आंखों से देख सकूं। भागवत ने एक कार्यक्रम में कहा , 'सबसे बड़ा लक्ष्य मेरे जीवन काल में हकीकत बन सकता है। हो सकता हैं कि हम उसे अपनी आंखों से देखें।'

भागवत ने कहा, 'कोई नहीं कह सकता कि मंदिर का कैसे और कब निर्माण होगा, लेकिन हमें इसके लिए तैयारी करने और तैयार रहने की जरूरत है।' भारतीय संस्कृति में सबको समाहित करने और हर किसी को साथ लेने में यकीन रखने वाला भाव बताते हुए भागवत ने कहा, 'हम विविधता में एकता की बात करते हैं।'

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