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सीमा विवाद सुलझाने के लिए ‘शांतिपूर्ण वार्ता’ के पक्ष में भारत और चीन

 Special News Coverage |  21 April 2016 8:33 AM GMT

सीमा विवाद सुलझाने के लिए ‘शांतिपूर्ण वार्ता’ के पक्ष में भारत और चीन

नई दिल्ली: भारत और चीन ने बुधवार को सीमा विवाद सुलझाने के लिए 'शांतिपूर्ण वार्ता' के प्रति कायम रहने की सहमति जताई है। दोनों ओर से इस मुद्दे पर साफ बातचीत हुई। दोनों देश सीमा विवाद को सुलझाने के लिए ‘निष्पक्ष, उचित और एक दूसरे को मंजूर हल’ निकालने के लिए राजी हैं।

दोनों देश के बीच शांतिपूर्ण ढंग से सीमा विवाद को सुलझाने का फैसला इस संबंध में बुधवार को हुई 19वें दौर की बैठक में किया गया। बैठक में भारतीय पक्ष का नेतृत्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार

अजीत डोभाल ने किया, जबकि चीन का नेतृत्व उनके समकक्ष यांग जिची ने किया।

यह सहमति ऐसे समय में बनी जब जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख मसूद अजहर पर संयुक्त राष्ट्र में प्रतिबंध लगाने की भारत की कोशिशों में चीन की अड़ंगेबाजी से नकारात्मक माहौल है। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने सीमा विवाद हल करने के तरीकों पर चर्चा करने के लिए चीन के उनके समकक्ष यांग जिची से यहां 19वें दौर की सालाना वार्ता की, जिसमें यह फैसला हुआ।

दोनों देशों के नेताओं ने 3488 किलोमीटर लंबी वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर विस्तृत, गहन और स्पष्ट विचार-विमर्श किया, जिसका सीमा निर्धारण नहीं होने की वजह से दोनों पक्षों के बीच तनाव है। दोनों ओर से इस मुद्दे पर साफ बातचीत हुई। चीनी विदेश मंत्रालय के बयान में कहा गया कि डोभाल और जिची की बातचीत में सीमा विवाद सुलझाने के लिए शांतिपूर्ण बातचीत का तरीका अपनाने पर रजामंदी हुई। भारत और चीन सीमा से जुड़े विवादास्पद मुद्दों को सुलझाने के लिए ‘शांतिपूर्ण वार्ता’ के लिए तैयार हो गए हैं।

डोभाल ने अपनी टिप्पणी में उनके और यांग के बीच हुई अनौपचारिक वार्ता के महत्व को बताया और कहा कि बातचीत दिमाग से नहीं बल्कि दिल से हो रही है। दोनों पक्षों ने यह राय साझा की कि चीन-भारत के संबंधों की व्यापक संभावनाएं हैं। इसमें कहा गया है कि द्विपक्षीय संबंध 2014 में चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग की सफल भारत यात्रा और 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चीन यात्रा के बाद से व्यापक और तेज विकास के नए कालखंड में प्रवेश कर गए हैं ।

डोभाल और जिची के पास सीमा मुद्दे के अलावा सभी विवादस्पद द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर बातचीत का अधिकार है। इससे पहले जिची ने डोभाल का स्वागत करते हुए कहा कि उनका दौरा इस बैठक के प्रति भारत की गंभीरता और दोनों देशों के बीच रणनीतिक भागीदारी को बढ़ावा देने की भारत की कोशिश का सबूत है।

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