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'वेदों में दिया गया है गाय मारने वाले 'पापियों' की हत्या का आदेश' : पांचजन्य

 Special News Coverage |  18 Oct 2015 5:40 AM GMT

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नई दिल्ली : राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) के मुखपत्र पांचजन्य ने हाल ही में घटित दादरी हत्याकांड में मारे गये अखलाक की हत्या को सही ठहराया है और इस हत्या के विरोध स्वरूप पुरस्कार लौटाने वाले लेखकों पर निशाना साधा गया है। इतना ही नहीं, पांचजन्य के नए अंक की कवर स्टोरी में कहा गया है कि वेदों में गाय को मारने वाले ‘पापियों’ की हत्या का आदेश दिया गया है।

लेख में आगे लिखा गया है हममें से बहुत लोगों के लिए ये जीवन मरण का सवाल है। लेख में मदरसा और मुस्लिम नेताओं को कसूरवार ठहराते हुए लिखा गया है कि दादरी कांड में मारे गये अखलाक शायद इन्हीं लोगों के प्रभाव में आ गये थे। लेख में उन साहित्यकारों पर भी निशाना साधा गया है जो दादरी कांड के विरोध में सम्मान लौटा रहे हैं।


इस मुद्दे पर लेखकों पर सवाल उठाते हुए पत्रिका में लिखा गया है कि वे इस मामले पर शांत क्यों रहे? लेख में कहा गया है, ‘वेद का आदेश है कि गोहत्या करने वाले के प्राण ले लो. हममें से बहुतों के लिए तो यह जीवन-मरण का प्रश्न है।’ इस लेख को हिंदी लेखक तुफैल चतुर्वेदी (विनय कृष्ण चतुर्वेदी) ने लिखा है।

इस लेख में कहा गया है, ‘गोहत्या हमारे लिए इतनी बड़ी बात है कि सैकड़ों साल से हमारे पूर्वज इसे रोकने के लिए अपनी जान की बाजी लगा कर हत्या करने वालों से टकराते रहे हैं। इतिहास में सैकड़ों बार ऐसे मौके आए हैं, जब मुस्लिम आक्रमणकारियों ने हिंदुओं को मुसलमान बनाने के लिए उनके मुंह में बीफ ठूंसा है।’

लेख में हिंदुओं के लिए गाय की अहमियत पर कहा गया है कि 1857 में पहली क्रांति उस वक्त हुई, जब अंग्रेजों ने भारतीय सैनिकों को गोमांस के फैट वाली कारतूसों को दांत से काटने के लिए कहा था।

उधर, लेख पर प्रतिक्रिया देते हुए आरएसएस के विचारक राकेश सिन्हा ने कहा कि पांचजन्य में एक लेखक की ‘दिग्भर्मित’ राय को संघ की राय बताना गलत है। उन्होंने कहा कि यह लेखक की निजी राय है। पाञ्चजन्य में एक लेखक की दिग्भर्मित राय को संघ के राय बताना गलत है। लेखक की निजी राय है।


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