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राम कृष्ण के नाम पर राजनीत करने वाली बीजेपी बाबा भीमराव राम जी अम्बेडकर के सामने नतमस्तक क्यों?

राम कृष्ण के हमेशा विरोधी रहे थे बाबा भीमराव राम जी अम्बेडकर फिर बीजेपी के आइडियल क्यों? बीजेपी तो राम मंदिर बनाएगी तो बाबा के अनुआइ मानेगें!

 शिव कुमार मिश्र |  2018-04-14 06:09:02.0  |  दिल्ली

राम कृष्ण के नाम पर राजनीत करने वाली बीजेपी बाबा भीमराव राम जी अम्बेडकर के सामने नतमस्तक क्यों?

भारतीय जनता पार्टी ने देश पर राम के नाम पर सरकार बनाई. सबसे पहले राम मंदिर के नाम पर उत्तर प्रदेश में कल्याण सिंह के नेत्रत्व में सराकर बनी. उसके बीजेपी की सरकार बनती रही और फिर केंद्र में अटल बिहारी बाजपेयी के नेत्रत्व में सरकार बनी.


फिर 2014 में नरेंद्र मोदी के नेत्रत्व में राम मंदिर और हिंदुत्व के नाम पर सरकार बनी. अब उसी सरकार के मुखिया प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बौधधर्म स्वीकार करने वाले और राम कृष्ण को न मानने वाले बाबा भीमराव राम जी अम्बेडकर की जयंती मनाने में व्यस्त नजर आ रही है. क्या बीजेपी को अब राम में आस्था नहीं रही. क्या बीजेपी को अब हिंदू धर्म की अनुआइयों पर भरोषा नहीं रहा जो बोद्ध धर्म के लोंगों के सामने नतमस्तक हो रही है.


यह बात में नहीं कह रहा हूँ बाबा भीमराव राम जी अम्बेडकर ने जब बोद्धधर्म स्वीकार किया था तब कही थी आप भी जान लीजिये उन 22 बातों को जिनकी वजह से उन्होंने इस धर्म को स्वीकार किया था.


बौद्ध धर्म की दीक्षा लेने के लिए 22 प्रतिज्ञाएं:-

1. मैं ब्रह्मा, विष्णु और महेश को कभी ईश्वर नहीं मानूंगा और न ही मैं उनकी पूजा करूंगा.

2. मैं राम और कृष्ण को कभी ईश्वर नहीं मानूंगा, और न ही मैं उनकी पूजा करूंगा.

3. मैं गौरी, गणपति जैसे हिंदू धर्म के किसी देवी देवता को नहीं मानूंगा और न ही उनकी पूजा करूंगा.

4. ईश्वर ने कभी अवतार लिया है, इस पर मेरा विश्वास नहीं.

5. मैं ऐसा कभी नहीं मानूंगा कि तथागत बौद्ध विष्णु के अवतार हैं. ऐसे प्रचार को मैं पागलपन और झूठा समझता हूं.

6. मैं कभी श्राद्ध नहीं करूंगा और न ही पिंडदान करवाऊंगा.

7. मैं बौध धम्म के विरुद्ध कभी कोई आचरण नहीं करूंगा.

8. मैं कोई भी क्रिया-कर्म ब्राह्मणों के हाथों से नहीं करवाऊंगा.

9. मैं इस सिद्धांत को मानूंगा कि सभी इंसान एक समान हैं.

10. मैं समानता की स्थापना का यत्न करूंगा.

11. मैं बुद्ध के आष्टांग मार्ग का पूरी तरह पालन करूंगा.

12. मैं बुद्ध के द्वारा बताई हुई दस परिमिताओं का पूरा पालन करूंगा.

13. मैं प्राणी मात्र पर दया रखूंगा और उनका लालन-पालन करूंगा.

14. मैं चोरी नहीं करूंगा.

15. मैं झूठ नहीं बोलूंगा.

16. मैं व्याभिचार नहीं करूंगा.

17. मैं शराब नहीं पीऊंगा.

18. मैं अपने जीवन को बुद्ध धम्म के तीन तत्वों- प्रज्ञा, शील और करुणा पर ढालने का यत्न करूंगा.

19. मैं मानव मात्र के विकास के लिए हानिकारक और मनुष्य मात्र को उच्च-नीच मानने वाले अपने पुराने हिंदू धर्म को पूर्णत: त्यागता हूं और बुद्ध धम्म को स्वीकार करता हूं.

20. यह मेरा पूर्ण विश्वास है कि गौतम बुद्ध का धम्म ही सही धम्म है.

21. मैं यह मानता हूं कि अब मेरा नया जन्म हो गया है.

22. मैं यह प्रतिज्ञा करता हूँ कि आज से मैं बुद्ध धम्म के अनुसार आचरण करूंगा.


इन सब बातों को जानकर भी बीजेपी चुपचाप हिंदुत्व के पुरोधा होने की बात अपने उपर लागू कर पाएगी. बीजेपी लगातार हिंदू धर्म में व्याप्त कमियों को सही करने में नहीं वोट की राजनीत करने में आतुर दिख रही है. बीजेपी को साफ़ दिख रहा है कि अब राम मंदिर के नाम पर वोट मिलना मुश्किल कार्य लग रहा है . इसलिए कुछ नया किया जाय.

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