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सर्जिकल स्ट्रॉइक से सैनिकों की शहादत का बदला लेना था मुझे- पूर्व आर्मी चीफ

शुक्रवार को सर्जिकल स्ट्राइक के एक साल पूरे हो गए। पूर्व चीफ ने बताया कि यह एक सफल मिशन रहा, क्योंकि तब से अब तक देश में कोई बड़ी आतंकी घटना नहीं हुई है। पूर्व आर्मी चीफ ने ये बात नितिन ए गोखले की किताब 'सिक्योंरिंग इंडिया द मोदी वे' की लांचिंग के दौरान कही।

 आनंद शुक्ल |  2017-09-30 10:12:23.0  |  नई दिल्ली

सर्जिकल स्ट्रॉइक से सैनिकों की शहादत का बदला लेना था मुझे- पूर्व आर्मी चीफ

नई दिल्ली: सर्जिकल स्ट्राइक की बरसी पर पूर्व आर्मी चीफ दलबीर सिंह सुहाग ने इसका राज खोला। एक बुक लॉन्च के मौके पर पूर्व आर्मी चीफ सुहाग ने कहा कि इसका मकसद दुश्मन के दिल में खौफ पैदा करना था। शुक्रवार को सर्जिकल स्ट्राइक के एक साल पूरे हो गए।

पूर्व चीफ ने बताया कि यह एक सफल मिशन रहा, क्योंकि तब से अब तक देश में कोई बड़ी आतंकी घटना नहीं हुई है। पूर्व आर्मी चीफ ने ये बात नितिन ए गोखले की किताब 'सिक्योंरिंग इंडिया द मोदी वे' की लांचिंग के दौरान कही।
मणिपुर में एनएसएनसी के द्वारा 20 सैनिकों की हत्या के बाद सेना ने 2015 में म्यांमार में सर्जिकल स्ट्राइक किया था। जबकि जम्मू कश्मीर के उरी में सेना के एक शिविर पर हमले के बाद साल 2016 में इस तरह का हमला पाक के कब्जे वाले कश्मीर में 28-29 सितंबर की दरमियानी रात को किया गया था।
सर्जिकल स्ट्राइक को कौन सी चीज अन्य ऑपरेशन्स से अलग करती है के सवाल पर उन्होंने कहा कि इस तरह के ऑपरेशन पहले अंजाम नहीं दिए गए जिसमें एक साथ 250 किलोमीटर के दायरे में कई आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया हो। सुहाग ने खुलासा किया कि भले ही 18 सितंबर को उरी ब्रिगेड हेडक्वार्टर पर हमला हुआ और इसका सीधा बदला लेने के लिए कार्रवाई की गई, लेकिन सर्जिकल स्ट्राइक करने की योजना बहुत पहले से शुरू हो गई थी।



जनरल दलबीर सिंह ने कहा, 'सर्जिकल स्ट्राइक का उद्देश्य क्या है? पहला दुश्मन के दिल में खौफ और असुरक्षा की भावना पैदा करना था। यह भी बताना था कि वे अपनी ही जमीन पर असुरक्षित हैं। यह भी महत्वपूर्ण है कि इस तरह की स्ट्राइक का क्या प्रभाव है। इन हमलों से दुश्मन को रोकने में प्रभाव पड़ता है। पिछले एक साल में हमारे यहां कोई बड़ी आतंकी वारदात नहीं हुई है।' उन्होंने कहा, 'सर्जिकल स्ट्राइक को मंजूरी देना प्रधानमंत्री का साहसिक फैसला था। इसका श्रेय मेरे सक्षम कमांडरों और बहादुर जवानों को भी जाता है, जिन्होंने इसे अंजाम तक पहुंचाया।'

जब उनसे पूछा गया कि क्या सर्जिकल स्ट्राइक अनुमानित प्रभाव हासिल करने में कामयाब रही। तो सुहाग ने कहा कि पिछले साल हुई सर्जिकल स्ट्राइक के बाद भारत ने दुनिया को अनिश्चितता जैसी चीज का परिचय कराया है। जनरल ने कहा कि पिछले साल हुई सर्जिकल स्ट्राइक के बाद सीमा पर कोई बड़ा हमला नहीं हुआ। सुहाग ने अपनी बात जनरल बिपिन रावत की बात को दोहराते हुए खत्म की और कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो भारत, पाकिस्तान में फिर सर्जिकल स्ट्राइक करेगा.

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