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दिग्विजय सिंह का दावा- देविंदर को बचाने की हो रही है कोशिश, इसीलिए NIA को सौंपी जांच

 Arun Mishra |  18 Jan 2020 2:56 AM GMT  |  दिल्ली

दिग्विजय सिंह का दावा- देविंदर को बचाने की हो रही है कोशिश, इसीलिए NIA को सौंपी जांचDigvijay Singh

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने शुक्रवार को आरोप लगाया कि केंद्र में भाजपा के नेतृत्व वाली मोदी सरकार डीएसपी दविंदर सिंह को बचाने की कोशिश कर रही है। जम्मू कश्मीर पुलिस का डीएसपी देविंदर सिंह पिछले सप्ताह तीन आतंकियों के साथ गिरफ्तार हुआ था। दिग्विजय सिंह ने कहा कि देविंदर सिंह के आतंकवादी लिंक हैं, लेकिन उन्हें बचाने के लिए सरकार ने वाईसी मोदी की अगुवाई वाली एनआईए को जांच सौंपी है, जिन्होंने गुजरात में अमित शाह को जमानत दी थी।

मोदी-शाह को क्लीन चिट दे चुके हैं NIA प्रमुख शुक्रवार को मीडिया से बात करते हुए दिग्विजय सिंह ने कहा कि, 'डीएसपी रहे देविंदर सिंह के केस की जांच एनआईए करेगी, जिसके प्रमुख वाईसी मोदी हैं। वह गुजरात के निवासी हैं। वाईसी मोदी ने 2002 के गुजरात के दंगों के मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को तथा सोहराबुद्दीन केस में गृहमंत्री अमित शाह को क्लीन चिट दे चुके हैं। उन्हें यह केस सौंपा ही इसलिए गया है कि देविंदर सिंह को बचाया जा सके।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने कहा कि 2002 के संसद हमले में देविंदर सिंह की रहस्यमय भूमिका है। अफजल गुरु ने भी इस संबंध में संकेत दिए थे। सिंह पर पुलवामा हमले में भी भूमिका होने का संदेह है। इसलिए, देविंदर सिंह के आतंकवादी लिंक की निष्पक्ष रूप से जांचना चाहिए। ना कि वाईसी मोदी द्वारा करायी जाए। उन्होंने कहा कि राष्ट्रव्यापी अशांति तब तक जारी रहने की संभावना है जब तक कि केंद्र नागरिकता संशोधन अधिनियम को रद्द नहीं करता है और देश भर में एनआरसी को लागू नहीं करने का वादा करता है।

इससे पहले राहुल गांधी ने भी मामले को फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलाने की मांग करते हुए गांधी ने सवाल किया कि प्रधानमंत्री, गृह मंत्री और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार भी देविंदर सिंह के मामले पर चुप क्यों हैं। राहुल ने केस को एनआईए को दिए जाने पर आपत्ति जताई है। इसके साथ ही प्रमुख वाईसी मोदी पर हमला किया है। राहुल गांधी ने कहा है कि एजेंसी एक 'दूसरे मोदी' के नेतृत्व में है जिसने गुजरात दंगों और हरेन पांड्या की हत्या की जांच की थी। उन्होंने कहा, 'आतंकवादी डीएसपी देविंदर को चुप कराने का सर्वोत्तम तरीका है केस को एनआईए के हाथों सौंप देना।


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