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देश विदेशों में लोंगों की रिझाने वाले डॉ कुमार विश्वास राजनीति में क्यों नहीं हुए कामयाब?

 Special Coverage News |  28 April 2019 11:29 AM GMT  |  दिल्ली

देश विदेशों में लोंगों की रिझाने वाले डॉ कुमार विश्वास राजनीति में क्यों नहीं हुए कामयाब?

देश ही नहीं विदेशों में भी माँ हिन्दी के परचम को फैलाने वाले सरस्वती पुत्र डॉ कुमार विश्वास को देश की जनता बड़े आदर सम्मान से देखती है। देश में ही नहीं उनके विदेशों में भी कार्यक्रम के दौरान भारी जन समूह उमड़ता है।

कुमार विश्वास का जन्म 10 फरवरी (वसन्त पंचमी) 1970 को उत्तर प्रदेश के ग़ाज़ियाबाद के पिलखुआ में एक मध्यवर्गी परिवार में हुआ था। उनके पिता डॉ चन्द्रपाल शर्मा आर एस एस डिग्री कॉलेज पिलखुआ में प्रवक्ता रहे। उनकी माता श्रीमती रमा शर्मा गृहिणी हैं। वे चार भाईयों और एक बहन में सबसे छोटे हैं। कुमार विश्वास की पत्नी का नाम मंजू शर्मा है।

कुमार विश्वास ने अपनी प्रारम्भिक शिक्षा लाला गंगा सहाय विद्यालय, पिलखुआ से प्राप्त की। राजपूताना रेजिमेंट इंटर कॉलेज से बारहवीं उत्तीर्ण होने के बाद उनके पिता उन्हें इंजीनियर बनाना चाहते थे। डॉ कुमार विश्वास का मन मशीनों की पढ़ाई में नहीं लगा और उन्होंने बीच में ही वह पढ़ाई छोड़ दी। साहित्य के क्षेत्र में आगे बढ़ने के ख्याल से उन्होंने स्नातक और फिर हिन्दी साहित्य में स्नातकोत्तर किया, जिसमें उन्होंने स्वर्ण-पदक प्राप्त किया। तत्पश्चात उन्होंने कौरवी लोकगीतों में लोकचेतना विषय पर पीएचडी प्राप्त किया। उनके इस शोध-कार्य को 2001 में पुरस्कृत भी किया गया।




डॉ कुमार विश्वास ने अपना करियर राजस्थान में प्रवक्ता के रूप में 1994 में शुरू किया। तत्पश्चात वो अब तक महाविद्यालयों में अध्यापन कार्य कर रहे हैं। इसके साथ ही डॉ विश्वास हिन्दी कविता मंच के सबसे व्यस्ततम कवियों में से हैं। उन्होंने अब तक हज़ारों कवि-सम्मेलनों में कविता पाठ किया है। साथ ही वह कई पत्रिकाओं में नियमित रूप से लिखते हैं। डॉ विश्वास मंच के कवि होने के साथ साथ हिन्दी फ़िल्म इंडस्ट्री के गीतकार भी हैं। उनके द्वारा लिखे गीत अगले कुछ दिनों में फ़िल्मों में दिखाई पड़ेगी। उन्होंने आदित्य दत्त की फ़िल्म 'चाय-गरम' में अभिनय भी किया है।

कुमार इस समय मलेशिया में है। उन्होंने कहा है कि मलेशिया के पहले कवि-सम्मेलन में कुआलालम्पुर के इस सुन्दर ऑडिटोरियम में भारतीय मूल के सभी क्षेत्रों के लोग और भारतीय दूतावास के अधिकारी हैं। हॉउस फुल था, सो अतिरिक्त व्यवस्था की गई है। मलेशिया के पहले दौरे में मिली इस मुहब्बत का अशेष आभार व्यक्त करता हूँ। उन्होने कहा है कि मलेशिया में पहला हिंदी कवि सम्मेलन हुआ।मलय से तक्षशिला पढ़ने आए आचार्य विष्णुगुप्त के शिष्य सिंहरण ने सिकंदर-आक्रमण के समय चंद्रगुप्त के सेनापति की भूमिका निभाई थी। बाटू केव्स मंदिर मे सनातन धर्म पुनर्जीवक पूज्य आद्य शंकराचार्य जी की प्रतिमा भी मुख्य मंदिर मे विराजमान है।




कुमार विश्वास अगस्त 2011 के दौरान जनलोकपाल आन्दोलन के लिए गठित टीम अन्ना के एक सक्रिय सदस्य रहे हैं। वे 26 नवम्बर 2012 को गठित आम आदमी पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य और पार्टी के संस्थापक सदस्य हैं। डॉ कुमार विश्‍वास ने 2014 के लोकसभा चुनाव में अमेठी से लोकसभा का चुनाव भी लड़ा, परन्‍तु हार गए। वो एक ऐसे छवि वाले कवि रहे हैं जिसने राजनीति को युगधर्म के आलावा कुछ नहीं समझा। उनके नेत्रत्व में दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सबसे बड़ी जीत दिलाई। जिसमें डॉ कुमार विश्वास की अहम भूमिका रही। डॉ कुमार की सबसे बड़ी खासियत यह भी है उन्होंने कभी किसी लालच के चलते समझौता नहीं किया। इसका ही सबसे बड़ा कारण रहा कि आम आमदी पार्टी से दूरियां बढती गई। कुमार ने कभी भी देश के स्वाभिमान से भी समझौता नहीं किया। इसके चलते ही उनकी अपनी पार्टी में बात बिगडती गई। उनकी पार्टी के नेता चाहते थे कि वो जब जैसा कहें तब वो वैसा ही बोलें. कुमार ने इन बातो पर समझौता नहीं किया और कुमार ने देश हित की बात की। कुमार ने एक और बड़ी बात यह है कि कुमार वास्तव में विश्वास के काबिल है। उन्होंने अगर पीएम मोदी ने कुछ गलत कहा तो उनके खिलाफ भी बोले और किसी और नेता भी नहीं बख्सा। अभी हाल फिलहाल में उन्होंने जम्मू कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ़्ती को भी बुआ कहकर समझाया।




कई राजनीतिक पार्टी उनकों अपने खेमें में लाना चाहते हैं पर वो अडिग रहे हैं। राजनीति से रूठे कवि कुमार विश्वास कहते हैं "सियासत में मेरा खोया या पाया हो नहीं सकता। सृजन का बीज हूँ मिट्टी में जाया हो नहीं सकता।" उनका कहना है कि 'राजनीति 10 साल 5 साल लेकिन कविता हजार साल।' इसके लिए उन्होंने अपने स्वाभिमान को सर्वोपरि स्थान दिया और रोज कोई न कोई किसी पार्टी की बात करता रहा लेकिन उनका निर्णय अडिग रहा।


पुरस्कार

(1) डॉ कुंवर बेचैन काव्य-सम्मान एवम पुरस्कार समिति द्वारा 1994 में 'काव्य-कुमार पुरस्कार'

(2) साहित्य भारती, उन्नाव द्वारा 2004 में 'डॉ॰ सुमन अलंकरण'

(3) हिन्दी-उर्दू अवार्ड अकादमी द्वारा 2006 में 'साहित्य-श्री'

(4) डॉ उर्मिलेश जन चेतना मंच द्वारा 2010 में 'डॉ उर्मिलेश गीत-श्री' सम्मान कुमार विश्वास ने जनलोकपाल की लड़ाई में अन्ना हजारे जी के समर्थन के साथ ही जनलोकपाल का मंच द्वारा संचालन भी किया था और जनलोकपाल बिल की अदभुत लडॉई लडने के बाद ही कुमार विश्वास इंदौर में उन्हे अग्रसेन महाराज की जयंती पर जब उनसे इंदौर आने का आग्रह किया। तो उन्होने मना नहीं किया और वह सीधे दुबई से शो करते हुए अपने घर भी नहीं गए सीधे इंदौर आ गए कुमार विश्वास वा कई बहुत अच्छे इंसान है इनकी कविताए अदभुत है।


विभिन्न पत्रिकाओं में नियमित रूप से छपने के अलावा डॉ॰ कुमार विश्वास की दो पुस्तकें प्रकाशित हुई हैं- 'इक पगली लड़की के बिन' (1996) और 'कोई दीवाना कहता है' (2007 और 2010 दो संस्करण में) विख्यात लेखक स्वर्गीय धर्मवीर भारती ने डॉ विश्वास को इस पीढ़ी का सबसे ज़्यादा सम्भावनाओं वाला कवि कहा है। प्रथम श्रेणी के हिन्दी गीतकार 'नीरज' जी ने उन्हें 'निशा-नियामक' की संज्ञा दी है। मशहूर हास्य कवि डॉ सुरेन्द्र शर्मा ने उन्हें इस पीढ़ी का एकमात्र आई एस ओ:2006 कवि कहा है।

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