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कुमार विश्वास ने क्यों कही ये बड़ी बात, आज की खबरें थी, सो जाइए, सब ठीक है!

 Special Coverage News |  14 Nov 2019 5:10 PM GMT  |  दिल्ली

कुमार विश्वास ने क्यों कही ये बड़ी बात, आज की खबरें थी, सो जाइए, सब ठीक है!

हिंदी के प्रो और कवि डॉ कुमार विश्वास ने आज की दिन के बड़ी खबरों को लेकर अपनी पीड़ा कुछ यूँ बयाँ की. उन्होंने कहा कि पीड़ित नागरिक का गिरेबान पकड़ घसीटता कलेक्टर, उपेक्षित-निरादृत मृत्यु का वरण करता नोबेल-योग्यता सम्पन्न गणितज्ञ, केन्द्रीय वि०वि० में अपमानित होती स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा,योग्यता के आधार पर चयनित,धर्म के आधार पर अपमानित होता अध्यापक.आज की खबरें थी, सो जाइए, सब ठीक है.

1-पीड़ित नागरिक का गिरेबान पकड़ घसीटता कलेक्टर

अमेठी जिले के कलेक्टर प्रशांत शर्मा ने जिस तरह मृतक के पीसीएस भाई को बुरी तरह घसीटकर ले जाने की घटना सामने आई वो वाकई शर्मनाक थी जिसे स्वंय मुख्यमंत्री ने सज्ञान लेते हुए आईएएस प्रशांत कुमार को हटा दिया.

2-नोबेल-योग्यता सम्पन्न गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह

पीएमसीएच कैंपस में महान गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह का पार्थिव शरीर रखा है, जिनके परिजनों को एम्बुलेंस तक मुहैया कराने की औपचारिकता अस्पताल प्रशासन ने नहीं निभाई. शर्मनाक है ये! जिस आदमी की उपलब्धियों पर बिहार समेत देश गर्व करता है, अंत में भी उसके साथ ऐसा व्यवहार?

इसके बाद कुमार विश्वास ने लिखा कि उफ़्फ़, इतनी विराट प्रतिभा की ऐसी उपेक्षा? विश्व जिसकी मेधा का लोहा माना उसके प्रति उसी का बिहार इतना पत्थर हो गया? नितीश कुमार, गिरिराज सिंह , अश्विनी कुमार चौबे और नित्यानंद राय आप सबसे सवाल बनता हैं. भारतमाँ क्यूँ सौंपे ऐसे मेधावी बेटे इस देश को जब हम उन्हें सम्भाल ही न सकें?

3-केन्द्रीय विश्व विद्यालय में अपमानित स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा होती है और पूरा समाज इस बात को देखता रहता है.

4-धर्म के आधार पर अपमानित होता अध्यापक.

बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय में 5 नंवबर को एक गैर हिंदू असिस्टेंट प्रोफेसर फिरोज खान की नियुक्ति के विरोध में संकाय के छात्र कई दिन से धरने पर बैठे हैं. 7 नंवबर को शुरू हुए इस धरने के बाद यूनिवर्सिटी ने इस नियुक्ति को लेकर एक स्पष्टीकरण जारी करते हुए साफ कहा था, 'काशी हिंदू विश्वविद्यालय की स्थापना इस उद्देश्य से की गई थी कि यह विश्वविद्यालय जाति, धर्म, लिंग और संप्रदाय आदि के भेदभाव से ऊपर उठकर राष्ट्रनिर्माण हेतु सभी को अध्ययन व अध्यापन के समान अवसर देगा.' लेकिन इसके बावजूद छात्र अपनी मांग पर अड़े हुए हैं. गौरतलब है कि प्राचीन शास्त्रों, ज्योतिष और वेदों व संस्कृत साहित्य को पढ़ाने वाले इस संकाय की स्थापना 1918 में हुई थी.

कुमार विश्वास ने कहा है कि विद्या-योग्यता भी "धर्म" की बंधक हो गई अब ?कैसा भारत बना रहे है हम? संविधान व निजी आस्थाओं के बीच संघर्ष बढ़े तो राजनेताओें के अलावा सब का नुक़सान तय है ! होता रहा है,हो रहा है, होगा ! समय रहते सचेत न हुए हम सब,तो पुरखों की कमाई आज़ादी से न्याय न कर सकेंगे

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