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नागरिकता संशोधन एक्ट यानी सीएए से पाकिस्तान बहुत खुश, पाकिस्तानी मीडिया में उड़ रही है भारतीय मुसलमानों की मज़ाक

एक पाकिस्तानी एंकर ने तो हंसते हुए कहा कि भारतीय मुस्लिम कहते थे कि हमें पाकिस्तान की जरूरत नहीं है लेकिन भारत को भी उनकी जरूरत नहीं है।

 Shiv Kumar Mishra |  14 Jan 2020 7:11 AM GMT  |  दिल्ली

नागरिकता संशोधन एक्ट यानी सीएए से पाकिस्तान बहुत खुश, पाकिस्तानी मीडिया में उड़ रही है भारतीय मुसलमानों की मज़ाक

माजिद अली खां राजनीतिक संपादक

केंद्र सरकार द्वारा नागरिकता संशोधन एक्ट यानी सीएए पास करने के बाद पूरे देश में मचे हल्ले ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है। क्योंकि ये एक्ट सीधे तौर पर भारत की सबसे बड़ी अल्पसंख्यक आबादी मुसलमानों को भी प्रभावित करता है। सीएए के विरोध में मुसलमानों ने मुखर होकर आवाज़ बुलंद की और बलिदान भी दिया। दुनिया के मुस्लिम देशों ने भी इसका नोटिस लिया और बयान जारी किए। जब भारत में इतना हल्ला है तो पाकिस्तान भी चुप रहे ऐसा नहीं हो सकता। खुद केंद्र सरकार के मंत्री किसी न किसी बहाने से विरोध को पाकिस्तान से जोड़ रहे हैं और लोगों का ध्यान भटकाना चाहते हैं। अब यदि पाकिस्तान की मीडिया की बात की जाए कि वो इस एक्ट को किस नज़र से देख रहे हैं तो पता चलता है कि वो बहुत मज़े ले लेकर भारतीय मुसलमानों की मज़ाक उड़ा रहे हैं और ताने मार रहे हैं। पाकिस्तानी सोशलमीडिया पर तथा न्यूज़ पोर्टल पर भी ये बहस खूब हो रही है कि भारतीय मुसलमानों को अकल आ रही है या नहीं और हिन्दू मुस्लिम एकता, गंगा यमुना तहज़ीब की बातें अब कैसीनो लग रही हैं।

देश की आज़ादी के समय भारत पाकिस्तान दो अलग अलग देश बन गए। मुसलमानों की आबादी भी इनमें बंट गयी। एक बड़ा हिस्सा पाकिस्तान जाकर अलग हो गया और एक हिस्सा भारत में ही रहने का फैसला कर चुका था। भारतीय मुसलमानों ने हिन्दू मुस्लिम एकता का नारा लगाते हुए जीवन व्यतीत किया और जब भी पाकिस्तान का ज़िक्र आया तो यही कहा कि तुम्हारे से अच्छा हमारा देश है। पाकिस्तान को ये बातें सदा नागवार गुज़रती थी और हालत ये थी कि दुनिया के सामने कश्मीर मामले पर भी भारतीय मुस्लिम पाकिस्तान पीछे धकेल दिया करते थे। बहुत चाहकर भी भारतीय मुसलमानों ने पाकिस्तान कीमत चाल मुस्लिम देशों खासतौर पर अरब देशों में कामयाब नहीं होने दी। भारतीय मुसलमानों ने मुस्लिम दुनिया में यही कहा कि भारत का मुसलमान बहुत ढंग से ज़िन्दगी गुज़ार रहा है और उसे किसी भी तरह की दिक्कत नहीं है।

ताज़ा स्थिति बिलकुल उलट है। सीएए में नागरिकता दिए जाने के मापदंड धर्म के आधार पर तय किये गए हैं जिनसे मुसलमानों में बेचैनी बढ़नी तय है। सीएए के साथ एनआरसी को अगर पूरे देश में लागू कर दिया गया तो देश में भयावह स्थिति पैदा होगी और मुसलमानों के सामने वजूद का संकट पैदा हो जाएगा जिस वजह से मुस्लिम सड़कों पर आने और मरने तक के लिए तैयार हो गया।



मुसलमानों की इस हालत पर पाकिस्तान में चर्चा होनी लाज़मी है। पाकिस्तानी विश्लेषकों के मुताबिक भारत के मुसलमान को अब पता चला कि वो किस गड्ढे में गिरा हुआ है। पाकिस्तान एंकर चटखारे ले लेकिन भारतीय मुसलमानों को ताना मार रहे हैं कि हिन्दू मुस्लिम भाईचारे का भूत निकल गया या अभी बाकी है। पाकिस्तानी नेता और पत्रकार दुनिया के सामने मुखर होकर बता रहे हैं कि मुसलमानों का कत्लेआम कराने की तैयारी है। पाकिस्तानी मीडिया की ये बातें सुनकर भारतीय मुस्लिम बहुत खिन्नता महसूस कर रहा है। वो समझने से कासिर है कि आखिर इनका जवाब क्या दिया जाए। पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के कथित प्रधानमंत्री ने तो बोलते हुए यहाँ तक कह दिया है कि भारतीय मुसलमानों ने खुद को कशमरियों से दूर रखा और उनके साथ होने वाले भारतीय सेना के ज़ुल्म के साथ रहें लेकिन अब शायद उन्हें अकल आएगी कि कश्मीर के बाद उनका नंबर है।



एक पाकिस्तानी एंकर ने तो हंसते हुए कहा कि भारतीय मुस्लिम कहते थे कि हमें पाकिस्तान की जरूरत नहीं है लेकिन भारत को भी उनकी जरूरत नहीं है। तो वो जाएंगे कहाँ। ये बातें सुनकर भारतीय मुसलमानों पर क्या गुज़रती है ये मुस्लिम ही महसूस कर सकता है। ऊपर से केंद्र सरकार के मंत्री और ज़ख्म पर मिर्च छिड़क रहे हैं कि सीएए के विरोध से तो पाकिस्तान खुश हो रहा होगा, इन बेवकूफों को कौन समझाए कि पाकिस्तान तो ऐसे कानूनों पर खुश होता है जिसमें भारतीय मुसलमानों को दिक्कत उठानी पड़ती है। इससे पहले भी सभी मुद्दों पर चाहे बाबरी मस्जिद हो, तीन तलाक हो सबके बारे में यही मज़ाक बनाई गई थी। हमारे देश के नेतृत्व को ये बात समझनी चाहिए कि देश की एकता और अखंडता को कोई खतरा न पहुंचे।

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