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राष्ट्रपति कोविंद के अरुणाचल दौरे से बौखलाया चीन, कहा दोनों देशो के रिश्ते का रखे ख्याल

चीन ने भारत को नसीहत देते हुए कहा है कि ऐसे वक्त में जब दोनों देशों के रिश्ते बेहद संवेदनशील दौर से गुजर रहे हैं, भारत को इसका ध्यान रखना चाहिए

 Ekta singh |  2017-11-20 12:14:44.0  |  नई दिल्ली

राष्ट्रपति कोविंद के अरुणाचल दौरे से बौखलाया चीन, कहा दोनों देशो के रिश्ते का रखे ख्याल

नई दिल्ली: राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के अरुणाचल दौरे से चीन बखौला गया है. चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लू कांग ने कहा है कि भारत को मौजूदा हालात को देखते हुए इससे बचना चाहिए.

चीन ने भारत को नसीहत देते हुए कहा है कि ऐसे वक्त में जब दोनों देशों के रिश्ते बेहद संवेदनशील दौर से गुजर रहे हैं, भारत को इसका ध्यान रखना चाहिए. चीनी प्रवक्ता ने कहा कि दोनों ही देश मतभेद वाले मुद्दों का समाधान निकाल रहे हैं. चीन ने

अरुणाचल में लगातार दौरों पर ऐतराज जताते हुए कहा कि हमें ऐसा समाधान निकालना चाहिए जो सभी को स्वीकार हो.

भारत ने चीन की आपत्तियों को खारिज करते हुए कहा कि अरूणाचल प्रदेश देश का एक अभिन्न अंग है और भारतीय नेता राज्य की यात्रा करने के लिए उतने ही स्वतंत्र है जितने कि देश के अन्य किसी हिस्से की.

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद रविवार को अरुणाचल प्रदेश की विधानसभा में नवनिर्मित भवन का उद्घाटन करने गए थे. यहां

विधानसभा के विशेष सत्र को संबोधित करते हुये कोविंद ने कहा था कि आपके पास इस इमारत की तरह अपने लोगों के लिये जगह होनी चाहिये, जिन्होंने बेहद उम्मीद और अकांक्षाओं के साथ आपको चुना है.

अपने मतदाताओं की अकांक्षाओं को बरकरार रखने और पूरी गंभीरता से उनकी सेवा करने के लिये आपको उनकी जिम्मेदारियां साझी करनी चाहिये. राष्ट्रपति ने कहा कि संसदीय लोकतंत्र में पार्टी लाइन पर चुनाव लड़े जाते हैं लेकिन निर्वाचित प्रतिनिधि पार्टी के विधायक नहीं होते बल्कि पूरे क्षेत्र के विधायक होते हैं. राष्ट्रपति ने कहा था कि अरुणाचल प्रदेश देश के लोगों के लिये प्रेरणा का स्रोत है.

बीते शुक्रवार को ही चीन और भारत के अधिकारियों ने बीजिंग में भारत-चीन मामलों पर परामर्श व समन्वय कार्यतंत्र (डब्ल्यूएमसीसी) के 10वें चरण में सीमा से संबंधित मुद्दों पर चर्चा की थी. विदेश मंत्रालय ने एक बयान में बताया कि दोनों देशों ने भारत-चीन सीमा के सभी पक्षों की स्थितियों की समीक्षा की और द्विपक्षीय संबंधों में सुधार के लिए सीमा क्षेत्र पर शांति बनाए रखने पर सहमत हुए.

इसी साल अगस्त में डोकलाम में दोनों देशों ने अपनी सेना हटा ली थी. जिसके सीमा विवाद पर दोनों मुल्कों में पहली सकारात्मक बातचीत हुई है.

डोकलाम विवाद पर समाधान के करीब दो महीने बाद भारत और चीन के बीच पहली बार सीमा क्षेत्र से जुड़े सभी पक्षों पर बातचीत हुई. इस बातचीत में सीमा क्षेत्र की स्थितियों की समीक्षा के साथ ही हालात शांतिपूर्ण बनाए रखने की चर्चा हुई थी.

भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) 3,488 किलोमीटर तक है. चीन ने गत छह नवंबर को रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण के अरूणाचल प्रदेश के सीमाई इलाकों का दौरा करने पर भी विरोध जताया था.

सीमा विवाद के समाधान के लिए दोनों पक्षों के विशेष प्रतिनिधियों द्वारा बातचीत के 19 दौर हो चुके है. उम्मीद है कि बातचीत का 20वां दौरा अगले महीने नई दिल्ली में होगा.

हालांकि तिथि की घोषणा अभी नहीं की गयी है. राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और उनके चीनी समकक्ष यांग जेची सीमा वार्ता के लिए नामित विशेष प्रतिनिधि है.

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