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#Section377 : सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, समलैंगिकता अब अपराध नहीं

समलैंगिकता के पक्षकारों को सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी राहत देते हुए समलैंगिक संबंध को अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया है

 Arun Mishra |  6 Sep 2018 6:55 AM GMT  |  दिल्ली

#Section377 : सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, समलैंगिकता अब अपराध नहीं
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नई दिल्ली : आईपीसी की धारा 377 की संवैधानिक वैधता पर सुप्रीम कोर्ट ने आज अपना फैसला सुना दिया है। समलैंगिकता के पक्षकारों को सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी राहत देते हुए समलैंगिक संबंध को अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया है। बताते चलें कि धारा 377 की संवैधानिक वैधता को कोर्ट में चुनौती दी गई थी। पांच जजों की संवैधानिक बेंच ने इस मामले में आज यह ऐतिहासिक फैसला सुनाया है।

सुप्रीम कोर्ट ने धारा 377 को मनमाना करार देते हुए व्यक्तिगत चुनाव को सम्मान देने की बात कही है। बता दें कि 17 जुलाई को शीर्ष कोर्ट ने 4 दिन की सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था।


-जजों ने कहा कि समाज को पूर्वाग्रहों से मुक्त होना चाहिए. हर बादल में इंद्रधनुष खोजना चाहिए. उल्लेखनीय है कि इंद्रधनुषी झंडा एलजीबीटी समुदाय का प्रतीक है. सुप्रीम कोर्ट ने आईपीसी की धारा 377 को मनमाना बताया है.

-मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा और जस्टिस एएम खानविल्कर ने कहा कि समान लिंग वाले लोगों के बीच रिश्ता बनाना अब धारा 377 के तहत नहीं आएगा.

-बेंच ने माना कि समलैंगिकता अब अपराध नहीं. लोगों को अपनी सोच बदलनी होगी

-समलैंगिक लोगों को सम्मान के साथ जीने का अधिकार है

-मैं जो हूं वो हूं. लिहाजा जैसा मैं हूं उसे उसी रूप में स्वीकार किया जाए- दीपक मिश्रा

-कोई भी अपने व्यक्तित्व से बच नहीं सकता है. समाज अब व्यक्तिगतता के लिए बेहतर है. मौजूदा हालत में हमारे विचार-विमर्श विभिन्न पहलू दिखता है.

- इस मुद्दे पर चार अलग अलग राय सामने आई है-जस्टिस दीपक मिश्रा

गौरतलब है कि मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा, जस्टिस रोहिंटन नरीमन, एएम खानविल्कर, डी वाई चंद्रचूड़ और जस्टिस इंदु मल्होत्रा की संवैधानिक पीठ इस मामले पर फ़ैसला किया. शीर्ष अदालत में आईपीसी की धारा 377 की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर जुलाई में ही सुनवाई पूरी हो गई थी. सुनवाई के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था.

सहमति से समलैंगिक यौनाचार को अपराध की श्रेणी में रखने वाली धारा 377 पर मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने 10 जुलाई को सुनवाई शुरू की थी और चार दिन की सुनवाई के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया.

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