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'स्विस बैंकों' में भारतीयों के खाते खंगालने की कोशिशें तेज: केंद्र सरकार

 Special Coverage News |  27 Nov 2016 10:26 AM GMT  |  New Delhi

स्विस बैंकों में भारतीयों के खाते खंगालने की कोशिशें तेज: केंद्र सरकार

नई दिल्ली: देश के अंदर नोटबंदी के जरिए ब्लैक मनी पर स्ट्राइक करने के बाद सरकार अब विदेशों में जमा काले धन को वापस लाने के लिए कदम उठा रही है। भारत ने पिछले महीनों में कम से कम 20 'प्रशासनिक सहायता' से जुड़े अनुरोध स्विट्जरलैंड से किए हैं। सरकार ने टैक्स बचा कर स्विस बैंकों में पैसा जमा करने वालों की जानकारी मांगी है। 'प्रशासनिक सहायता' में किसी देश को अपने नागरिक द्वारा टैक्स चोरी करने का सबूत स्विट्जरलैंड को देना होता है। जिसके बाद स्विस प्रशासन उनका आकलन करने के बाद फेडरल गजेट जारी करता है। स्थानीय कानूनों के मुताबिक संदिग्धों को अपने अकाउंट की जानकारी सार्वजनिक न होने देने के लिए अपील करने का एक आखिरी मौका मिलता है।

भारत और स्विट्जरलैंड ने पिछले हफ्ते नया पैक्ट साइन किया है। जिसके अनुसार सिंतबर 2018 के बाद से खातों की जानकारी की आसानी से अदला-बदली की जा सकेगी। पहले भी कई भारतीय खातों की जानकारी भारत द्वारा मांग करने पर साझा की गई थी। जिसके बाद टैक्स विभाग और प्रवर्तन निदेशालय ने उन पर कार्रवाई की। संदिग्ध खातों की जानकारी जुटाने का काम पिछले महीनों में काफी तेज हुआ है। नवंबर में अब तक 5 भारतीयों के नाम फेडरल नोटिफिकेशन के जरिए जारी हुए हैं। इन नोटफिकेशन्स में खाताधारक का नाम, राष्ट्रीयता और जन्मतिथि होती है। वहीं कंपनियों के खाते में कंपनी का नाम और रजिस्ट्रेशन का देश दर्ज होता है। काफी पहले से स्विट्जरलैंड विदेशियों के खातों के बारे में जानकारी को गुप्त रखने के लिए जाना जाता रहा है। लेकिन अब वैश्विक दबाव के कारण सबूत मुहैया कराने की शर्त पर स्विट्जरलैंड कुछ मामलों में खातों की जानकारी सार्वजनिक कर रहा है।

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