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क्या आप जानते है कि किन बेंको को जल्दी और किस बेंक को देरी से मिल रही है करेंसी?

 Special Coverage News |  2016-11-18 04:20:24.0  |  New Delhi

क्या आप जानते है कि किन बेंको को जल्दी और किस बेंक को देरी से मिल रही है करेंसी?

नई दिल्ली: देश में डिमॉनेटाइजेशन की प्रक्रिया के केन्द्र में बैंक (सरकारी और प्राइवेट) हैं. यह बैंकों की जिम्मेदारी है कि 500 और 1000 रुपये की पुरानी करेंसी को गैरकानूनी घोषित किए जाने के बाद वह अहम भूमिका निभाए. पुरानी करेंसी को नागरिकों से वापस लेकर उसके बदले में नई करेंसी देने का काम बिना रुके लगातार चलता रहे. साथ ही देश के सभी बैंक (सरकारी और प्राइवेट) अपनी सभी ब्रांच को इस काम को करने के लिए तैयार करें. लेकिन क्या आपका बैंक इस जिम्मेदारी के लिए तैयार है? क्या उसके पास वह तमाम सुविधाएं उपलब्ध हैं जिससे वह इस काम को बखूबी अंजाम दे सके?



रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया देश का सेंट्रल बैंक है. बैंकों का बैंक या कहें सरकार का बैंक. नई करेंसी की प्रिंटिंग का काम रिजर्व बैंक के जिम्मे रहता है. मौजूदा समय में 2000 रुपए, 500 रुपए और 100 रुपए की करेंसी की प्रिंटिंग का काम बिना रुके चल रहा है. आरबीआई के प्रिंटिंग प्रेस में इन करेंसी की छपाई का काम पूरा होते ही इन्हें देश के तमाम बैंकों को भेज दिया जाता है.बड़े प्राइवेट बैंक को मिलती है नई करेंसीनई करेंसी पहुंचते ही वह बैंक इसे अपनी ब्रांच और फिर सीधे अपने कस्टमर को उपलब्ध करा देता है. इस संचार के लिए रिजर्व बैंक शिड्यूल्ड बैंकों की लिस्ट तैयार करता है. आमतौर पर इस लिस्ट में सभी सरकारी बैंक शामिल किए जाते हैं और उनके साथ बड़े प्राइवेट बैंक भी रखे जाते हैं.लिहाजा, करेंसी को लेकर जारी संकट में जानिए कि क्या आपका बैंक रिजर्व बैंक की इस प्राथमिकता वाली शिड्यूल्ड लिस्ट में आता है.



इस लिस्ट में शामिल बैंक करेंसी चेस्ट से लैस रहते हैं. यह करेंसी चेस्ट बड़ी मात्रा में करेंसी को सुरक्षित रखने की क्षमता होती है. उक्त बैंक की सभी ब्रांच अपनी दिन-प्रतिदिन की जरूरत के लिए करेंसी चेस्ट से कैश का लेन-देन करती हैं. यह भी रिजर्व बैंक ने तय किया है कि बैंक की किसी ब्रांच में कैश रखने की कितनी लिमिट होनी चाहिए और इस लिमिट के पार होने पर उसे अतिरिक्त कैश नजदीकी करेंसी चेस्ट में जमा कराना होता है.जिन बैंकों को इस लिस्ट में नहीं शामिल किया गया है उनके पास किसी तरह का कोई करेंसी चेस्ट नहीं रहता है. लिहाजा रिजर्व बैंक के निर्देशों का पालन करने के लिए इन्हें अपने अतिरिक्त कैश को किराए पर किसी अन्य बैंक के करेंसी चेस्ट में जमा कराना पड़ता है.



मौजूदा स्थिति में जब शिड्यूल्ड बैंक अपनी ब्रांच और एटीएम की व्यवस्था को दुरुस्त करने की कवायद में लगे हैं, नॉन शिड्यूल्ड बैंकों की जरूरत उनकी प्राथमिकता में नहीं हैं.अब रिजर्व बैंक के इन नियमों के तहत यह सूची देखें कि क्या आपका अपना बैंक शिड्यूल्ड बैंक की लिस्ट में शामिल है. क्या आपके बैंक की किसी ब्रांच के पास करेंसी चेस्ट मौजूद है जिससे एटीएम और ब्रांच में करेंसी की सप्लाई लगातार बनाए रखने में मदद मिले.

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