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...तो इसलिए मनाया जाता है ईद-उल-जुहा का त्योहार

 Special Coverage News |  2016-09-12 09:45:18.0  |  नई दिल्ली

...तो इसलिए मनाया जाता है ईद-उल-जुहा का त्योहार

नई दिल्ली: ईद-उल-जुहा अर्थात बकरीद मुसलमानों का प्रमुख त्योहार है। मुसलमान साल में दो ईदें मनाते हैं- ईद-उल-जुहा और ईद-उल-फितर। ईद-उल-फितर को मीठी ईद जबकि ईद-उल-जुहा को बकरीद या फिर बड़ी ईद भी कहा जाता है।

वैसे तो हर पर्व त्योहार से जीवन की सुखद यादें जुड़ी होती हैं लेकिन ई-उल-फितर और ईद-उल-जुहा से मुसलामानों यानी इस्लाम धर्म के मानने वालों का ख़ास रिश्ता है। बकरीद पर खरीददार बकरे, नए कपड़े, खजूर और सेवईयाँ खरीदते हैं। बकरीद पर कुर्बानी देना शबाब का काम माना जाता है। इसलिए हर कोई इस दिन कुर्बानी देता है।

कुर्बानी या बलिदान का त्योहार भी है। इस्लाम में कहा गया है कि अपनी सबसे प्यारी चीज अल्लाह की राह में खर्च करो। अल्लाह की राह में खर्च करने का मतलब नेकी और भलाई के कामों में खर्च करना है।

कुर्बानी की कथा: यहूदी, ईसाई और इस्लाम तीनों ही धर्म के पैगंबर हजरत इब्राहीम ने कुर्बानी का जो उदाहरण दुनिया के सामने रखा था, उसे आज भी परंपरागत रूप से याद किया जाता है। आकाशवाणी हुई कि अल्लाह की रजा के लिए अपनी सबसे प्यारी चीज कुर्बान करो, तो हजरत इब्राहीम ने सोचा कि मुझे तो अपनी औलाद ही सबसे प्रिय है। उन्होंने अपने बेटे को ही कुर्बान कर दिया। उनके इस जज्बे को सलाम करने का त्योहार है ईद-उल-जुहा।

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