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जानिए कारण! एक ही गोत्र में क्यों नहीं करनी चाहिए शादी?

 Special Coverage News |  2017-01-18 08:22:13.0  |  New Delhi

जानिए कारण! एक ही गोत्र में क्यों नहीं करनी चाहिए शादी?

नई दिल्ली : हमारे समाज में खासकर हिन्दू धर्म में विवाह पद्धति के संबंध में कई प्राचीन परंपराएं मौजूद हैं। इनमें से एक है अपने गौत्र में शादी न करना। खासकर हिन्दू धर्म में अंतर्जातीय विवाह का हमेशा से ही विरोध होता आया है। इसके अलावा मां, नानी और दादी का गौत्र भी टाला जाता है। कभी-कभी जाति समान हो फिर भी विरोध होता है। ये विरोध होता है लड़का और लड़की के समान गोत्र के कारण। ऐसा क्यों किया जाता है?

अगर आप गोत्र के बारे में नहीं जानते तो आज हम आपको बताते हैं। दरअसल 'गोत्र' शब्द का अर्थ होता है आपका वंश और कुल। ये आपको आपकी पीढ़ी से जोड़ता है। वास्तव में इसके पीछे भी ऋषियों द्वारा विकसित किया गया वैज्ञानिक चिंतन और गौत्र परंपरा है।

शास्त्रों में भी देखा गया है हमारे हिंदू धर्म में एक ही गोत्र में शादी करना वर्जित है। ऋषियों के अनुसार, गौत्र परंपरा का उल्लंघन कर विवाह करने से उनकी संतान में कई अवगुण और रोग उत्पन्न होते हैं। वहीं सदियों से ये भी मान्यता चली आ रही हैं कि लड़का और लड़की अगर एक ही गोत्र के हो तो वो एक-दूसरे के भाई-बहन होते हैं और भाई बहन में शादी करना तो दूर इस बारे में सोचना भी पाप माना जाता है।

3 गोत्र को छोड़कर ही करें शादी

हमारे हिंदू धर्म के अनुसार इंसान को हमेशा 3 गोत्र को छोड़कर ही शादी करनी चाहिए। क्योंकि इंसान जिस गोत्र का होता है वो उसका पहला गोत्र होता है। और दूसरा गोत्र उसकी मां का होता है और तीसरा गोत्र उसकी दादी का होता है इसलिए हमेशा तीन गोत्र को छोड़कर ही शादी करनी चाहिए।

वहीं कई शोधों में ये बात सामने आई है कि इंसान को जेनेटिक बीमारी न हो इसके लिए एक इलाज है 'सेपरेशन ऑफ जींस', यानी अपने नजदीकी रिश्तेदारो में विवाह नहीं करना चाहिए। रिश्तेदारों में जींस सेपरेट (विभाजन) नहीं हो पाते हैं और जींस से संबंधित बीमारियां जैसे कलर ब्लाईंडनेस आदि होने की संभावनाएं रहती हैं। इसी को ध्यान में ऱखते हुए शास्त्रों में भी समान गोत्र में शादी न करने की परंपरा बनाई गई है।

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