Home > विलुप्ति की कगार पर पारसी समुदाय, आज उनके न्यू ईयर 'नवरोज' पर समुदाय की एक झलक

विलुप्ति की कगार पर पारसी समुदाय, आज उनके न्यू ईयर 'नवरोज' पर समुदाय की एक झलक

 Special Coverage News |  2016-08-17 07:37:09.0  |  मुम्बई

विलुप्ति की कगार पर पारसी समुदाय, आज उनके न्यू ईयर नवरोज पर समुदाय की एक झलक

मुम्बई: भारतीय पारसी समुुदाय अपनी शांतिप्रियता के लिए मशहूर तथा अपनी घटती जनसंख्या के लिए भी चर्चा में रहा है। पूरी दुनिया में लगभग एक लाख़ तीस हज़ार के क़रीब पारसी लोग मौजूद हैं जिनमें से लगभग 70 हज़ार भारत में रहते हैं। आज पारसी न्यू ईयर है जिसे पारसी भाषा में 'नवरोज या नावरुज़' भी कहा जाता है। 3000 सालों से मनाया जाने वाला ये न्यू ईयर पारसियों के सबसे प्राचीन त्योहारों में से एक है। नवरोज़ के दिन हर पारसी परिवार 'फ़ायर टेम्पल' यानी 'अगियारी' जाता है और नए साल के लिए प्रार्थना करते हुए चन्दन और लोबान की अगरबत्तियाँ भी जलाता है।

अपने धर्म की रक्षा के लिए आठ सौ साल पहले भारत आए इस समुदाय के लोग आज भारत के कई शहरों जैसे मुम्बई, पुणे, बैंगलोर और हैदराबाद में फैले हुए हैं। पारसी कम्यूनिटी के गिने-चुने लोगों ने भारत में इतना बड़ा नाम कमाया है जिसकी बराबरी हर कोई नहीं कर सकता। इनमें टाटा, गोदरेज से लेकर बॉलीवुड स्टार्स और कई ऐसे लोग हैं जिनका कॉन्ट्रिब्यूशन भूला नहीं जा सकता। पारसी अपना सरनेम अपने पेशे के हिसाब से रखते हैं और मरने के बाद डेड बॉडी को जलाया या दफनाया नहीं जाता बल्कि गिद्धो को खिलाया जाता है।

जहां भारत में पारसी खत्म होते जा रहे हैं वहीं सरकार उन्हें बचाए रखने के लिए कई तरीके आजमा रही है। पारसी परिवारों को बच्चा पैदा करने पर सरकार पैसे देती है। फर्टिलिटी रेट कम हो जाने पर सरकार 5 लाख रुपए की इलाज राशि भी मुहैय्या कराती है।

Tags:    
Share it
Top