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जानिए क्यों 'मुहर्रम' त्योहार नहीं, बल्कि 'मातम' का दिन है

 Special Coverage News |  2016-10-12 06:15:44.0  |  नई दिल्ली

जानिए क्यों मुहर्रम त्योहार नहीं, बल्कि मातम का दिन है

नई दिल्ली: ईद के बाद मुसलमानों में मनाया जाने वाला एक त्यौहार है जिसे 'मुहर्रम' के नाम से जाना जाता है। सबसे पहले तो ये जान लेना बेहद ज़रूरी है कि मोहर्रम कोई त्योहार नहीं है बल्कि शिया मुस्लिम समुदाय के लिए ये एक 'मातम का दिन' है। विशेष रूप से लोग अपने आपको दुखों से भर लेते हैं। खुद के शरीर को तलवारों से काटते हैं।

तो चलिए अब आपको बताते हैं कि आखिर मुस्लिम समुदाय के लोग ऐसा क्यों करते हैं- इस्लाम के पैगंबर मोहम्मद साहब के छोटे नवासे इमाम हुसैन की शहादत की याद में मनाया जाता है। मोहर्रम एक महीना है, जिसमें शिया मुस्लिम दस दिन तक इमाम हुसैन की याद में शोक मनाते हैं। इस्लाम धर्म के संस्थापक हजरत मुहम्मद साहब के छोटे नवासे हजरत इमाम हुसैन और उनके 72 अनुयाइयों का कत्ल कर दिया गया था। हुसैन इराक के शहर करबला में यजीद की फौज से लड़ते हुए शहीद हुए थे।

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