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महिला दिवस पर कवि दीपक प्रियांश ने बताई नारी की शक्ति

 alok mishra |  2017-03-08T14:02:19+05:30  |  new delhi

महिला दिवस पर कवि दीपक प्रियांश ने बताई नारी की शक्ति

महिला दिवस पर युवा कवि दीपक प्रियांश कवि ने कुछ पंक्तियाँ लिखी है .कवि दीपक प्रियांश एक युवा कवि है .ये मूलरूप से उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले के है . आज के दौर में जहां युवा अपने लिए एक अच्छी नोकरी और बढ़िया व्यापार करना चाहता है .वहीँ कवि दीपक प्रियांश ने साहित्य का पथ चुना . . पूरा नाम दीपक मिश्रा है .

नारी के हजार रूप विद्यमान चहुँ ओर
नारी इस समाज की तो एक मूल इकाई हैं
नारी के सम्मान में जो शीश ना झुका सका है
मूल्य बस उसका तो मात्र एक पाई है


पैदा होते रानी बनी ब्याह होत लक्ष्मी वो
घर में जो काम करी तब वो बनी बाई है
कौन कहता है रानी लक्ष्मीबाई है नहीं
जितनी भी नारी हैं वो सब लक्ष्मीबाई हैं

नन्द घर यशुदा खिलाय पालना में कृष्ण
अद्भुत वात्सल्य दृश्य को दिखाई हैं
जब मजबूर हुई रौद्र रूप दिखावन को
तब दुर्गा काली का ये रूप धर आई हैं

चूर अभिमान उसका हुआ है इस धरा पे
जिसने भी आँख नारी जाति पर उठाई है
चूर अभिमान सारा हो गया था रावण का
नारी अपमान की तो ये भी इक गवाही है

विनती है इनका न हास-उपहास करो
पूजन से इनके ही जग की भलाई है
नारियों को पूजा गया है जहाँ भी इस जहाँ में
अपनी दुनिया देवता ने वहीँ पर बसाई है




कवि दीपक प्रियांश


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