Home > शाकाहार अपनाने से क्या हैं फायदे, जानिए?

शाकाहार अपनाने से क्या हैं फायदे, जानिए?

 Special Coverage News |  2016-11-26 13:34:50.0  |  नई दिल्ली

शाकाहार अपनाने से क्या हैं फायदे, जानिए?

जर्मनी की इंस्टीट्यूट आफ सोशल मेडिसन एंड एपीडीमिओलोजी द्वारा वर्ष 1985 में प्रारम्भ किये गये सर्वेक्षण की अब तक की रिपोर्ट के अनुसार शाकाहारियों के रक्त में यूरिक एसिड की मात्रा कम होती है, उनके गुर्दे बेहतर कार्य करते हैं, रक्तचाप सामान्य, आदर्श कोलेस्ट्रोल सीमा में रहता है। एसे व्यक्तियों का प्रतिशत माँसाहारियों की अपेक्षा बहुत अधिक रहता है। शाकाहार उन्हें स्वस्थ और नीरोग बनाता है।शाकाहारी भोजन के गुणों को जानकर अब पाश्चात्य देशों में शाकाहार आन्दोलन तेज हो रहा है।
जीव या पशु संरचना पर ध्यान देने पर हम देखते हैं कि सर्वाधिक शक्तिशाली, परिश्रमी, व अधिक सहनशीलता वाले पशु जो लगातार कई दिन तक काम कर सकते हैं, जैसे हाथी, घोडा, बैल, ऊँट, आदि सब शाकाहारी होते हैं। इग्लेंड में परीक्षण करके देखा गया है कि स्वाभाविक माँसाहारी शिकारी कुत्तों को भी जब शाकाहार पर रखा गया तो उनकी बर्दाश्त शक्ति व क्षमता में वृद्धि हुई।

मांस सेवन से नुकसान :
सामान्य तौर पर एक बात जानने की कोशिश करें कि जब पशु बूचड़खाने में कसाई के द्वारा अपनी मौत को पास आते देखता है तो वह डर और दहशत से काँप उठता है। मृत्यु को समीप भाँप कर वह एक दो दिन पहले से ही खाना पीना छोड़ देता है। डर व घबराहट में उसका कुछ मल बाहर निकल जाता है। मल जब खून में जाता है तो खून जहरीला व नुकसान दायक बन जाता है। मौत से पहले नि;सहाय पशु आत्म रक्षा के लिये पुरुषार्थ करता है, छटपटाता है। पुरुषार्थ बेकार होने पर उसका डर, आवेश बढ़ जाता है। गुस्से से आँखें लाल हो जाती हैं, मुँह में झाग आ जाते हैं, ऐसी अवस्था में उसके अन्दर एक पदार्थ एड्रीनलिन उत्पन्न होता है जो उसके रक्तचाप को बढ़ा देता है व उसके माँस को जहरीला बना देता है। जब मनुष्य वह माँस को खाता है तो उसमें भी एड्रीनलिन प्रवेश कर उसे घातक रोगों की ओर धकेल देता है। एड्रनलीन के साथ जब क्लोरिनेटेड हाइड्रो कार्बन लिया जाता है तब तो यह हार्ट अटेक का गंभीरतम खतरा उत्पन्न कर देता है।

शाकाहार से फायदे :
अमेरिका के वेज्ञानिकों ने वर्षों की खोज के बाद, फलों, सब्जियों, दूध और खाद्यान्नों में पाये जाने वाले पोषक तत्वों का पता लगा लिया है और भोजन से ही कैंसर, हृदयरोग आदि असाध्य रोगों की चिकित्सा की दिशा में काम कर रहे हैं। कई डाक्टरों ने तो सलाह दी है कि अंगूर, पपीता, आम, खरबूजा, टमाटर, हरी पत्तेदार सब्जियाँ खाने से भोजन की नली का केंसर होने की संभावना कम हो जाती है। केंसर का एक कारण माँसाहार भी है। दूध पीने से आँत के केंसर से बचा जा सकता है। जो महिलायें शाकाहारी और रेशेदार भोजन करती हैं उन्हें स्तन केंसर नहीं होता। हावर्ड के एक अध्ययन में पशु माँस और गर्भाशय केंसर में सम्बन्ध स्थापित किया गया है।

क्या है रहस्य शाकाहार का?
अग्नि पर जब फल, फुल अनाज, दूध, दहीं, घी, तेल डाला जाता है तो वो यज्ञ बन जाता है। और उसी अग्नि पर जब मुर्दा, हड्डी, मांस का शरीर रखा जाता है, फिर वो पूरा हो या कटा हुआ हो, तो वो चिता बन जाती है।

हमें भी जब भूख लगती हे तो हमारे पेट के भीतर मे जठराग्नि प्रज्जवलित होती है और जब ये जठराग्नि प्रज्जवलित होती है तब हम उसमें भी कुछ ना कुछ डालते है। अगर हम उस में चिकन, मटन या मांस का कुछ भी डालते हे तो वो चिता बन जाती है और अगर हम उसमे फल, फुल, अनाज, दूध, दहीं, घी, तेल डालते हे तो वो यज्ञ बन जाता है।
अब आपके पेट के भीतर चिता हो या यज्ञ यह निर्णय आप को करना है। इसलिए शाकाहारी बने और स्वस्थ रहे ।

Tags:    
Share it
Top