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'सर्जिकल ऑपरेशन' के ख़िलाफ़ 'तबर्रा'...'चर्चा-ए-गोश्तखोरी' किताब बांटी गयी.

 शिव कुमार मिश्र |  2016-10-02 02:49:56.0  |  कैराना

सर्जिकल ऑपरेशन के ख़िलाफ़ तबर्रा...चर्चा-ए-गोश्तखोरी किताब बांटी गयी.

चंदन श्रीवास्तव

देश इस समय सर्जिकल हमले का जश्न मना रहे है. उस समय पश्चिमी यूपी में ऐसा कुछ हो रहा है जिससे देश की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था पर प्रश्न चिन्ह खड़ा कर दिया है. ये सब घटना प्रदेश के पूर्व प्रमुख सचिव एवं पूर्व आईएएस अधिकारी ने कहा है जो कि कभी मुजफ्फरनगर के जिलाधिकारी भी रहे थे जब कैराना इसी जिले में था.

यह एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी की आंखोदेखी है। एलओसी कहीं ज्यादा खतरनाक घट रहा है, यहां यूपी में।


कैराना मे 'सर्जिकल ऑपरेशन' के ख़िलाफ़ 'तबर्रा'...'चर्चा-ए-गोश्तखोरी' किताब बांटी गयी...तूफ़ान से पहले का सन्नाटा ! मैं आज ही अपने ४ दिन के पश्चिमी उत्तर प्रदेश के दौरे से वापिस लौटा हूँ। आज देश भर में मोदी सरकार के साहसिक निर्णय व सेना की बहादुरी का जश्न मनाया जा रहा है, परंतु कैराना में कुछ राष्ट्र विरोधी तत्वों द्वारा इस कार्यवाही के विरुद्ध 'तबर्रा' पढ़ा जा रहा है....यह मैं पूरी ज़िम्मेदारी से कह रहा हूँ। इस स्थानीय इंटेलिजेन्स पर प्रशासन सो रहा है। इस तबर्रे में पाकिस्तान के कलाकारों की वापसी, सेना के POK में प्रवेश कर आतंकियों को मारने की निंदा व इंडो-पाक युद्ध की स्थिति में क़ौम की सलामती की दुआ भी की गयी है...यहाँ सेना के पक्ष में कोई आतिशबाज़ी नहीं हुयी...सन्नाटा छाया है...अपने ही देश में कैराना जैसी जगहों पर कोई भी देशभक्त सेना के सम्मान में आतिशबाज़ी करने की हिम्मत तो क्या...सोच भी नहीं सकता।


'तबर्रा' क्या है......?

'तबर्रा' में खाफ़िरों की लानत-मलानत कर किसी दूसरे वर्ग की आस्थायों का मज़ाक़ बनाकर अपने धर्म की एकजुटता के लिए तश्करा किया जाता है।
मैंने पहले भी कह चुका हीं कि पश्चिमी उ.प्र. सम्प्रदायिकता रूपी ज्वालामुखी के मुहाने पर बैठा है। हाल में तूफ़ान से पहले के सन्नाटे से गुज़र रहा है। चुनाव पास है ... कैराना थाने में दर्ज ६०२८ आपराधिक मामलों में पुलिस प्रशासन द्वारा राजनीतिक कारणों से सम्यक् करवाई नहीं की जा सकी है.... नामज़द बलात्कारी व हत्यारे भी खुले घूम रहे हैं,भय का माहौल है। उ.प्र. सरकार आँख बंद करे बैठी है ....सपा ने एक प्रभावशाली मज़हबी मंत्री की काट के लिए व सम्प्रदायिकता फैलाने के लिए दादरी कांड के माध्यम से विकसित हुए एक मुस्लिम युवा MLC को आगे किया जा रहा है.....दादरी के बिसाड़ा कांड पर आधारित 'चर्चाए-गोश्तखोरी' नामक किताब का विमोचन किया गया है।


जिसे सत्ताधारी मैं अपने इस दौरे में पश्चिमी उ.प्र. के कई जिलों से होकर लौटा हूँ। इस क्षेत्र में कई गाँव व छोटे-बड़े क़स्बों में unattended criminality के कारण कैराना जैसे पलायन जैसी स्थिति आज आम बात है... कैराना तो मीडिया में आ चुका है।


मेरा उक्त कथन तथ्यों पर आधारित है, कोई अफ़वाह नहीं... मैं ज़िम्मेदार आईएएस अधिकारी रहा हूँ... मेरी बात को किसी सम्प्रदाय के विरुद्ध न समझा जाए। मैं सभी वर्गों का सम्मान करता हूँ और किसी भी सम्प्रदाय के सभी लोगों को देश द्रोही कहना भी उचित नहीं है।


मेरा उद्देश्य प्रदेश को दंगो से बचाने का है,ताकि निर्दोष लोग न मरें ...ग़रीब बेघर न हों। ऐसे तबर्रे अन्य स्थानो पर भी हुए है....ऐसा मुझे सरकारी अभिसूचना से ज्ञात हुआ है। मेरा DM के रूप में अनुभव है कि साम्प्रदायिक दंगो से पूर्व इस प्रकार के तबर्रे होना आम बात हैं।


आओ इस प्रदेश को दंगो की आँधी से बचाएँ ... मुख्यमंत्री व देश के ग्रह मंत्री को तत्काल सज्ञान लेना चाहिए....स्थानीय प्रशासन दंगे की प्रतीक्षा में द्रष्टा बना बैठा है।
जय हिंद-जय जवान !!
Surya Pratap Singh

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