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दुनिया के सबसे बड़े विमान एयरलैंडर-10 ने भरी पहली उड़ान, जानें खूबियां

 Special Coverage News |  2016-08-18 09:14:45.0  |  London

दुनिया के सबसे बड़े विमान एयरलैंडर-10 ने भरी पहली उड़ान, जानें खूबियां

लंदन: दुनिया के सबसे बड़े विमान 'एयरलैंडर-10' ने पहली उड़ान भर ली है। एयरलैंडर-10 ने मध्य इंग्लैंड के कार्डिंग्टन में एक हवाई अड्डे पर एकत्र भीड़ की तालियों की गड़गड़ाहट के बीच उड़ान भरी। बता दें यह विमान कुछ तकनीकी कारणों से पहली कोशिश में उड़ान नहीं भर पाया था। जानें इसकी खूबियां।

दुनिया का सबसे बड़ा एयरक्राफ्ट, जिसे 'फ्लाइंग बम' नाम दिया गया है। Airlander 92 मीटर लंबे, 44 मीटर चौड़े और 26 मीटर ऊंचे इस एयरक्राफ्ट के निर्माण में 25 मिलियन पौंड यानी करीब दो अरब रुपए खर्च हुए। इसे बनाने में करीब 10 साल का वक्त लगा है। इस परियोजना को विकसित करने के लिए ब्रिटेन की सरकार से 37 लाख डॉलर की आर्थिक मदद मिली थी।

हीलियम गैस से उड़ने वाले इस एयरक्राफ्ट का कुछ हिस्सा विमान का है, कुछ शिप का, तो कुछ हेलिकॉप्टर का। ये विमान तीन हफ्ते तक हवा में रहने की क्षमता रखता है। इसमें क्रू मेंबर्स समेत 48 यात्रियों को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने की क्षमता है। इसके साथ ही यह 10 हजार टन सामान ढो सकता है।

निर्माता हाईब्रिड एयर व्हिकल (एचएवी) के अनुसार, एयरलैंडर 10 को मूल रूप से अमेरिकी सेना के सतर्कता विमान के तौर पर विकसित किया गया है लेकिन इसका इस्तेमाल माल ढोने समेत वाणिज्यिक क्षेत्र के कई कार्यों में भी किए जाने की संभावना है।

किसी पैसेंजर जेट के मुकाबले इसकी लंबाई करीब 15 मीटर ज्यादा है। 148 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ान भरने वाला ये एयरलैंडर आप में ये एक हेलिकॉप्टर भी है, क्योंकि इसे उड़ने और उतरने के लिए रनवे की जरूरत नहीं पड़ती। इसे पानी पर भी उतारा जा सकता है और रिमोट से भी कंट्रोल किया जा सकता है। इस विमान का डिजाइन ब्रिटेन की हाइब्रिड एयर व्हीकल्स कंपनी ने तैयार किया है और दावा है कि ये एयरक्राफ्ट शोर नहीं करता है और न ही प्रदूषण छोड़ता है।

2009 में अमरीका की सेना को इस एयरक्राफ्ट को बनाने का आइडिया आया था। अमरीका अपनी सेना के लिए अफगानिस्तान सामान पहुंचाने के लिए इसका इस्तेमाल करना चाहता था, लेकिन रक्षा बजट कम होने की वजह से 2012 में प्रोजेक्ट को बीच में ही रोक दिया गया। बाद में ब्रिटिश कंपनी एयरलैंडर ने इस आइडिए को कैश करा लिया और अब ये एयरक्राफ्ट दुनिया के सबसे बड़े एयरक्राफ्ट के रूप में अब सबके सामने है।

इससे 85 साल पहले आर101 ने अक्तूबर 1930 में इसी हवाई अड्डे से उड़ान भरी थी और यह फ्रांस में दुर्घटनाग्रस्त हो गया था, जिससे 48 लोग मारे गए थे। विमान को पहले रविवार को उड़ान भरनी थी लेकिन तकनीकी कारणों से ऐसा नहीं हो सका था। विमान ने कल उड़ान भरी।

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