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चीन का नया पैतरा, नक्शा जारी कर भूटान की जमीन को बताया अपना

मानचित्र का दावा है कि भारतीय सेना ने डोकाला पास पर सीमा पार की। डॉकलाम पठार को भारत और भूटान भूटानी क्षेत्र के रूप में देखते हैं, लेकिन इस पर चीन द्वारा दावा किया जाता है।

 Special Coverage News |  2017-07-02 03:49:23.0  |  New Delhi

चीन का नया पैतरा, नक्शा जारी कर भूटान की जमीन को बताया अपना

नई दिल्ली : भारत और भूटान से सीमा विवाद पर चीन ने एक नया पैतरा अपनाया है। चीन ने नया नक्शा जारी किया है, जिसमें उसने गतिरोध वाली जमीन पर दावा किया है। अपने दावे को आगे बढ़ाते हुए चीन ने कहा है कि भारत ने उसकी जमीन में दखल दिया है।

इसके अलावा चीन ने अब एक नक्शा जारी किया है, जिसमें गतिरोध वाले क्षेत्र को दिखाया गया है। साथ ही साथ चीन ने भारत-चीन-भूटान त्रिकोणीय जंक्शन पर भी दावा किया है।मानचित्र का दावा है कि भारतीय सेना ने डोकाला पास पर सीमा पार की। डॉकलाम पठार को भारत और भूटान भूटानी क्षेत्र के रूप में देखते हैं, लेकिन इस पर चीन द्वारा दावा किया जाता है। ये नक्शा शुक्रवार को जारी किया गया है।
चीनी त्रिकोणीय जंक्शन को एक तीर द्वारा चिह्नित किया गया है, जो दावा करता है कि यह 1890 में ब्रिटिश-चीन संधि के अंतर्गत है। पिछले 4 दिनों से पूर्वोत्तर राज्य सिक्किम से सटे चीन के बॉर्डर पर तनाव है। भारत और चीन की सेनाएं आमने-सामने है।
चीन ने भारतीय सैनिकों पर बॉर्डर में घुसने और सड़क निर्माण का काम रोकने का आरोप लगाया है। बता दें कि पिछले कुछ दिनों से सिक्किम सेक्टर के डोंगलांग में चीन की ओर से सड़क बनाने का भारतीय सैनिकों ने विरोध किया। इसके बाद चीनी सैनिकों ने सिक्किम सेक्टर में भारत के दो बंकरों को तोड़ दिया। चीन इसे अपनी सीमा में बता रहा है। भारतीय सैनिकों ने चीनी सेना की इस कार्रवाई की विरोध किया।
चीन-भारत सीमा विवाद का इतिहास काफी लंबा है। दोनों देशों के बीच 3,488 किलोमीटर लंबी सीमा है जो जम्मू-कश्मीर से लेकर अरूणाचल प्रदेश तक है। इसमें 220 किलोमीटर का हिस्सा सिक्किम में पड़ता है। चीन के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि उम्मीद है कि देश अन्य देशों की संप्रभुता का सम्मान करें।
चीन-भूटान सीमा निरूपित नहीं है, किसी तीसरे पक्ष को इस मामले में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए तथा गैरजिम्मेदाराना टिप्पणी या कार्रवाई नहीं करनी चाहिए। चीन ने भारत पर गुप्त एजेंडे का आरोप लगाया और कहा कि अगर कोई तीसरा पक्ष, गुप्त एजेंडे से, हस्तक्षेप करता है तो यह भूटान की संप्रभुता का अपमान है।

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