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सुप्रीम कोर्ट का फैसला, राष्ट्रगान अगर फिल्म या डॉक्युमेंट्री का हिस्सा हो तो खड़ा होना जरूरी नहीं

 Arun Mishra |  2017-02-14 07:53:56.0  |  नई दिल्ली

सुप्रीम कोर्ट का फैसला, राष्ट्रगान अगर फिल्म या डॉक्युमेंट्री का हिस्सा हो तो खड़ा होना जरूरी नहीं

नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने सिनेमा घरों में राष्ट्रगान के मामले में नया फैसला सुनाया है। फैसले में कहा गया है कि अगर किसी फिल्म या डॉक्यूमेंट्री के दौरान बीच में राष्ट्रगान बजता है तो उसमें खड़ा होना ज़रूरी नहीं है। हालांकि फिल्म के शुरुअात में राष्ट्रगान होने पर खड़ा होना जरुरी है।

मंगलवार को मामले की सुनवाई के दाैरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि लोगों को फिल्म के दौरान राष्ट्रगान में खड़े होने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता है। इस मुद्दे पर बहस की जरूरत है। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने कहा कि अभी इस मामले को लेकर देश में कोई कानून नहीं है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम नैतिकता के पहरेदार नहीं हैं, मुद्दे पर बहस हो।

दरअसल, हो ये रहा था कि किसी-किसी फिल्म में दो बार राष्ट्रगान बज रहा था। ऐसा हाल में दंगल फिल्म में हुआ था। एक बार राष्ट्रगान सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार बजाया गया था। वहीं एक बार राष्ट्रगान फिल्म की स्क्रिप्ट का हिस्सा होने की वजह से बजा। इससे लोगों को थोड़ा अजीब लगा। सोशल मीडिया पर लोगों ने इसपर नाराजगी भी जाहिर की थी।

गौरतलब है कि इससे पहले दिसंबर 2016 में सुप्रीम कोर्ट ने सिनेमाघरों में राष्ट्रीयगान बजने से पहले सभी दर्शकों को सम्मान में खड़ा होने को कहा था। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा था कि राष्ट्रीय गान बजते समय सिनेमाहॉल के पर्दे पर राष्ट्रीय ध्वज दिखाया जाना भी अनिवार्य होगा। इस पर श्याम नारायण चौकसी नाम के शख्स ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर मांग की थी कि सिनेमा हॉल में प्रत्येक फिल्म के प्रदर्शन से पहले हर बार राष्ट्रगान बजाया जाए।

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