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इन 4 खूबियां के बिना नहीं बन सकते है आप देश के राष्ट्रपति!

 शिव कुमार मिश्र |  2017-06-14 08:00:59.0  |  दिल्ली

इन 4 खूबियां के बिना नहीं बन सकते है आप देश के राष्ट्रपति!

राष्ट्रपति चुनाव का बिगुल बज चुका है. चुनाव ओयाग ने नोमिनेशन फाइल करने की तारीख की घोषणा कर दी है. चुनाव आयोग के अनुसार 17 जुलाई को नोमिनेशन फाइल करने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी.

राष्ट्रपति बनने के लिए कुछ खास योग्यताओं की जरूरत होती है. अगर आप में ये योग्यताएं हैं तो आप भी राष्ट्रपति बनने की दौड़ में शामिल हो सकते हैं.

पद की योग्यता
संविधान के अनुच्छेद 58 के अनुसार कोई भी व्यक्त‍ि राष्ट्रपति होने के लिए योग्य तब होगा, जब उसमें ये सारी खूबियां होंगी तभी वो बन पायेगा भारत का राष्ट्रपति.

1. वह भारत का नागरिक हो

2. उसकी उम्र 35 साल पूरी हो चुकी हो

3. लोक सभा का सदस्य निर्वाचित किए जाने के योग्य हो

4. किसी लाभ के पद पर न हो. यदि कोई व्यक्त‍ि राष्ट्रपति या उपराष्ट्रपति के पद पर या संघ अ‍थवा किसी राज्य के मंत्रिपरिषद का सदस्य हो तो यह नहीं माना जाएगा कि वह लाभ के पद पर है.



राष्ट्रपति के ये अधिकार कर देंगे आपको हैरान
राष्ट्रपति बनने से पहले आप ये जान लें कि अगर आप राष्ट्रपति बने तो आपके पास कौन-कौन सी शक्त‍ियां होंगी.

देश के राष्ट्रपति का पद भारत में सबसे ऊंचा पद माना जाता है. भारत का राष्ट्रपति देश का संवैधानिक मुखिया होता है. संविधान में इस सर्वोच्च पद को कई शक्तियां और अधिकार दिए गए हैं. कुछ शक्त‍ियां ऐसी हैं जो देश में किसी भी दूसरे पदधारक के पास नहीं हैं.

मसलन, देश का कोई भी कानून राष्ट्रपति की अनुमति के बगैर नहीं बन सकता. विधेयक को कानून में बदलने के लिए आखिरी मुहर राष्ट्रपति की ही लगती है. लिहाजा ये एक अहम शक्ति है, संसद में पारित विधेयक राष्ट्रपति के पास मंजूरी के लिए भेजा जाता है. राष्ट्रपति या तो उस पर अपनी अनुमति देता है या विधेयक पर पुन: विचार करने के लिए संसद को वापस भेजता है. अगर संसद उसे फिर से पारित करती है तो राष्ट्रपति को उसे मंजूर करना ही पड़ता है.

इसके अलावा राष्ट्रपति को किसी विधेयक पर वीटो का भी अधिकार है. इसमें एक अहम वीटो होता है पॉकेट वीटो. यानी राष्ट्रपति के पास ये अधिकार है कि वो संसद में पारित किसी विधेयक को अनिश्चित काल के लिए अपने पास रखे.

राष्ट्रपति के पास मौत की सजा को खारिज करने की शक्त‍ि भी होती है. दया याचिका पर राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद अपराधी की सजा माफ की जा सकती है.

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