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कांग्रेस की इस चाल में फंस सकते है मोदी, फिर क्या करेगी बीजेपी?

कांग्रेस की चल दी अब तक की सबसे बड़ी चाल

 शिव कुमार मिश्र |  2017-05-04 15:15:48.0  |  दिल्ली

कांग्रेस की इस चाल में फंस सकते है मोदी, फिर क्या करेगी बीजेपी?

नवनीत मिश्र
नई दिल्लीः अकबर रोड स्थित कांग्रेस के केंद्रीय कार्यालय पर बुधवार को ब्रीफिंग के दौरान एक बड़े नेता से जब खबरनवीसों ने राष्ट्रपति चुनाव में उम्मीदवारों की दावेदारी को लेकर सवाल किए तो उन्होंने बड़े गेमप्लान का इशारा किया। कांग्रेस नेता ने साफ कर दिया कि पार्टी प्रणव मुखर्जी से खुश नहीं है। लिहाजा उन्हें दोबारा दावेदार नहीं बनाया जाएगा। जब पत्रकारों ने आडवाणी की दावेदारी पर सवाल पूछा तो कांग्रेस नेता ने उनके नाम पर समर्थन की संभावनाओं को नकारा नहीं। बल्कि संकेत दिए कि कांग्रेस आडवाणी के नाम को लेकर कानूनी माथापच्ची कर रही है कि दो दशक बाद केस खुलने पर इसके वैधानिक और नैतिक प्रभाव क्या होंगे। गैर भाजपा दलों को भरोसा है कि आडवाणी का नाम आने से मोदी खेमे में खलबली मच जाएगी। इस खलबली में ही सुकून ढूंढने की कोशिश है। वहीं माना जा रहा कि इससे मुस्लिम मतदाता भी भाजपा विरोधी दलों से नाराज नहीं होंगे। एक कांग्रेस नेता कहते हैं कि-''लोहा लोहे को काटता है। इस फार्मूले पर चलकर धर्मनिरपेक्ष ताकतें मोदी को आडवाणी से क्यों नहीं लड़ा सकतीं। इसमें राजनीतिक तौर पर क्या गलत है।''


श्रेय भी मिल जाएगा कांग्रेस को

कांग्रेस के कुछ शीर्ष नेताओं का मानना है कि जिस तरह से जनता में बात फैल रही है कि भाजपा के कुछ नेताओं के इशारे पर आडवाणी और जोशी के खिलाफ पुराना मामला खुला। उससे कांग्रेस इस मौके का फायदा उठा सकती है। कांग्रेस अपने किसी नेता को राष्ट्रपति बनाने की हैसियत में नहीं हैं। फिलहाल कलाम जैसा कोई नाम भी दूर-दूर तक जेहन में नहीं है, जिस पर सभी दल सहमत हो सकें। लिहाजा मोदी के काउंटर में गेम प्लान ही बचा है।



अगर कांग्रेस आडवाणी का नाम आगे करती है तो फिर उस नाम का विरोध करने की हिम्मत न भाजपा जुटा पाएगी न मोदी। अगर भाजपा विरोध करेगी तो फिर मुकदमे का जिन्न बाहर करने की बात सही साबित हो जाएगी। जनता में संदेश जाएगा कि कोई और नहीं बल्कि भाजपा वाले ही आडवाणी को राष्ट्रपति नहीं बनाना चाहते। लिहाजा कांग्रेस की ओर से नाम प्रस्तावित करने पर भाजपा की रजामंदी मजबूरी होगी। जिसके बाद आडवाणी राष्ट्रपति बनेंगे तो इसकी क्रेडिट कांग्रेस के खाते में आएगी।

कांग्रेस ले रही कानूनी राय

कांग्रेस के एक बड़े नेता ने इंडिया संवाद को बताया कि राष्ट्रपति चुनाव में अपनी ओर से बढ़त हासिल करने की हर संभावनाएं पार्टी तलाश रही है। भले ही इसके लिए कोई अप्रत्याशित नाम ही आगे क्यों न बढ़ाना पड़े। पार्टी की नजर में मोदी निरंकुश हैं। लिहाजा उनकी बढ़ती ताकत को रोकना हर हाल में पार्टी का लक्ष्य है। इसके लिए मोदी की पार्टी से जुड़े उनके प्रतिद्वंदी नेता का ही नाम क्यों न आगे बढ़ाना पड़े। पार्टी हिचकेगी नहीं। जहां तक आडवाणी का मामला है तो उनके बारे में भी पार्टी कानूनी राय ले रही है। दरअसल हाल में जिस तरह से सुप्रीम कोर्ट ने उन पर विवादित ढांचा ढहाने की साजिश का मुकदमा चलाने का फैसला लिया है, उससे दावेदारी पर क्या असर पडे़गा, इन बातों पर भी पार्टी विचार कर रही है। कांग्रेस का मानना है कि पार्टी में जेटली एंड कंपनी के इशारे पर आडवाणी के खिलाफ केस खुलवाया गया है। ताकि विपक्ष के पास भी उनकी दावेदारी को बढ़ाने पर सोचना पड़े। हालांकि पार्टी न्यायपालिका की निष्पक्षता पर पूरा भरोसा करती है।


कांग्रेस विपक्ष को कर रही लामबंद

उधर कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला कहते हैं कि पार्टी समूचे विपक्ष को एकसूत्र में बांधने की कोशिश में। भले ही पसंद का राष्ट्रपति तय करने के लिए विपक्ष के सामने संख्याबल की चुनौती है, मगर पार्टी हताश नहीं है। इसके लिए कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और राहुल गांधी लगातार विपक्षी नेताओं के संपर्क में बने हुए हैं। सक्रियता का आलम यह है कि सोनिया गांधी विभिन्न दलों के प्रमुख नेताओं से एक दौर की बातचीत कर चुकी हैं।





फिलहाल सोनिया गांधी की मुलाकात NCP सुप्रीमो शरद पवार, JDU के शरद यादव, CPI के डी राजा, JDS के एच. डी. देवगौड़ा, CPIM के सीतराम येचुरी, इंडियन मुस्लिम लीग केरल के महासचिव पी. के. कुन्हालीकुट्टी से हो चुकी है। पार्टी सूत्र बता रहे हैं कि अगले 10 दिनों में सोनिया गांधी TMC चीफ ममता बनर्जी, BSP सुप्रीमो मायावती और DMK नेता स्टालिन से मिलेंगी। कांग्रेस के मीडिया प्रभारी रणदीप सुरजेवाला का मानना है देश में लोकतंत्र को बनाए रखने और संविधान की रक्षा के लिए तमाम विपक्षी दलों को एक साथ आना चाहिए।

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