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तलाक शरीयत लॉ का हिस्सा, इससे कोई छेड़छाड़ स्वीकार नहीं: कमाल फारुकी

 Special Coverage News |  8 Dec 2016 7:49 AM GMT  |  New Delhi

तलाक शरीयत लॉ का हिस्सा, इससे कोई छेड़छाड़ स्वीकार नहीं: कमाल फारुकी

नई दिल्ली: तीन तलाक मामले पर इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले पर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के अध्यक्ष कमाल फारुकी ने कहा, तलाक शरीयत लॉ का हिस्सा है, इससे कोई छेड़छाड़ नहीं होनी चाहिए। इस्लाम महिलाओं के अधिकारों पर दुनिया के सबसे ज्यादा प्रगतिशील धर्मों में से एक है। संविधान हमें अपना धर्म मानने की आजादी देता है। यह कोर्ट की महज एक टिप्पणी है, फैसला नहीं।

बता दें लंबे अर्से से चल रहे तीन तलाक मामले पर
इलाहाबाद हाईकोर्ट
ने तीन तलाक को असंवैधानिक बताया। कहा तीन तलाक महिलाओं के संवैधानिक अधिकारों का हनन है। कोई भी पर्सनल लॉ बोर्ड संविधान से बड़ा नहीं है। यहां तक कि कोर्ट भी संविधान से ऊपर नहीं हो सकता।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि कुरान में भी तीन तलाक को अच्छा नहीं बताया गया है। कोर्ट ने यह भी कहा कि तीन तलाक देना मुस्लिम महिलाओं के प्रति क्रूरता है। कुरान में कहा गया है कि जब सुलह के सभी रास्ते बंद हो जाएं तभी तलाक दिया जा सकता है। लेकिन धर्म गुरुओं ने इसकी गलत व्याख्या की है।

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