Home > सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, आज से तीन तलाक ख़त्म - 5 में से 3 जजों ने बताया असंवैधानिक

सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, आज से तीन तलाक ख़त्म - 5 में से 3 जजों ने बताया असंवैधानिक

सुप्रीम कोर्ट ने एक साथ तीन तलाक को खत्म कर दिया है, कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि केंद्र सरकार संसद में इसको लेकर कानून बनाए...

 Arun Mishra |  2017-08-22 05:45:25.0

सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, आज से तीन तलाक ख़त्म - 5 में से 3 जजों ने बताया असंवैधानिक

नई दिल्ली : तीन तलाक के मुद्दे पर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने अपना ऐतिहासिक फैसला सुनाया। सुप्रीम कोर्ट ने एक साथ तीन तलाक को खत्म कर दिया है। अब दुनिया के कई इस्लामिक देशों की तरह भारत ने भी इसे खत्म कर दिया है। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि केंद्र सरकार संसद में इसको लेकर कानून बनाए। सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायधीश जे.एस. खेहर के नेतृत्व में 5 जजों की पीठ ने अपना फैसला सुनाया।


सुनवाई के दौरान जस्टिस आरएफ नरिमन, जस्टिस कुरियन जोसेफ और जस्टिस यूयू ललित तीन तलाक को असंवैधानिक घोषित करने के पक्ष में थे। वहीं चीफ जस्टिस जेएस खेहर और जस्टिस अब्दुल नजीर इसके पक्ष में थे। आज के बाद अगर कोई मुस्लिम पुरूष अपनी पत्नी को तीन तलाक देगा तो उसे अवैध माना जाएगा।


इससे पहले, खबर आई थी कि सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक पर ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए एक बार में तीन तलाक पर 6 महीने की रोक लगा दी है। संसद जब तक कानून नहीं लाती तब तक ट्रिपल तलाक पर रोक रहेगी। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि केंद्र सरकार संसद में इसको लेकर कानून बनाए। सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायधीश जे.एस. खेहर के नेतृत्व में 5 जजों की पीठ ने अपना फैसला सुनाया।

खंड पीठ में सभी धर्मों के जस्टिस शामिल हैं जिनमें चीफ जस्टिस जेएस खेहर (सिख), जस्टिस कुरियन जोसफ (क्रिश्चिएन), जस्टिस रोहिंग्टन एफ नरीमन (पारसी), जस्टिस यूयू ललित (हिंदू) और जस्टिस अब्दुल नजीर (मुस्लिम) शामिल हैं।


केंद्र सरकार ने कोर्ट में कहा था कि वह तीन तलाक को जायज नहीं मानती और इसे जारी रखने के पक्ष में नहीं है। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने माना था कि वह सभी काजियों को एडवायजरी जारी करेगा कि वे तीन तलाक पर न सिर्फ महिलाओं की राय लें, बल्कि उसे निकाहनामे में शामिल भी करें।

दरअसल, फरवरी 2016 में उत्तराखंड की रहने वाली शायरा बानो ने तीन तलाक के खिलाफ कोर्ट में एक अर्जी दाखिल की थी। इस पर शायरा का तर्क था कि तीन तलाक ना तो इस्लाम का हिस्सा है और ना ही आस्था। उन्होंने कहा कि उनकी आस्था ये है कि तीन तलाक मेरे और ईश्वर के बीच में पाप है। मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड भी कहता है कि ये बुरा है, पाप है और अवांछनीय है।

ट्रिपल तलाक यानी पति तीन बार 'तलाक' लफ्ज बोलकर अपनी पत्नी को छोड़ सकता है। निकाह हलाला यानी पहले शौहर के पास लौटने के लिए अपनाई जाने वाली एक प्रॉसेस। इसके तहत महिला को अपने पहले पति के पास लौटने से पहले किसी और से शादी करनी होती है और उसे तलाक देना होता है। सेपरेशन के वक्त को इद्दत कहते हैं। बहुविवाह यानी एक से ज्यादा पत्नियां रखना। कई मामले ऐसे भी आए, जिसमें पति ने वॉट्सऐप या मैसेज भेजकर पत्नी को तीन तलाक दे दिया।

Tags:    
Share it
Top