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साल 2016 की 10 वायरल झूठी खबरें, जिन पर आपने भी किया होगा विश्वास!

 Special Coverage News |  2016-12-28 08:25:26.0  |  New Delhi

साल 2016 की 10 वायरल झूठी खबरें, जिन पर आपने भी किया होगा विश्वास!

नई दिल्ली: नोटबंदी की घोषणा के बाद नोटबंदी से जुड़ी खबरें हों या नमक की कमी की अफवाहें हों, वर्ष 2016 में देशभर में फर्जी खबरों को लेकर भी खूब चर्चा हुई। इस तरह की अफवाहें फैलाने में जहां सोशल मीडिया का योगदान बढ़-चढ़ कर रहा, वहीं देश की मुख्यधारा की मीडिया भी इन फर्जी खबरों के झांसे में आ गई। इन खबरों की व्यापकता और प्रभाव इस कदर रहा कि यूनेस्को और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) जैसी आधिकारिक संस्थाओं को इनके खंडन के लिए आगे आना पड़ा।

यहां तक कि दुनिया की दो सबसे बड़ी सोशल नेटवर्किंग और इंटरनेट कंपनियों फेसबुक और गूगल को इस तरह की फर्जी खबरों के कारण कानूनी दांवपेच का सामना भी करना पड़ा।

आइए, नजर डालते हैं 2016 में इसी तरह की कुछ फर्जी खबरों पर, जिस पर देश की आम आबादी ने ही नहीं बल्कि कुछ शीर्ष मीडिया संस्थानों ने भी विश्वास कर लिया।

1) नए नोटों में जीपीएस चिप लगी हुई है, जिससे कालेधन का पता चल जाएगा

नोटबंदी के बाद फैली इस अफवाह ने तो आम नागरिकों के साथ-साथ मीडिया के एक समूह को भी अपनी चपेट में ले लिया। कालेधन और भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रधानमंत्री मोदी द्वारा नोटबंदी की घोषणा के कुछ ही देर बाद यह अफवाह फैलने लगी, जिसमें दावा किया गया कि आरबीआई द्वारा जारी किए गए 2,000 रुपये के नए नोटों में जीपीएस चिप लगी हुई है, जिससे सरकारी एजेंसी कभी भी कहीं भी रखे नोट का पता लगा सकती है।

यहां तक दावा किया गया कि इन नए नोटों को अगर जमीन के अंदर 120 मीटर नीचे तक दबा दिया जाए तो भी इसमें लगी जीपीएस चिप से सरकार को संकेत मिलेंगे। इस अफवाह का लाभ उठाते हुए कुछ लोगों ने निजी तौर पर ऐसे मोबाइल एप विकसित कर दिए, जिसमें स्कैन करने पर नोट के अंदर प्रधानमंत्री मोदी का भाषण चलने लगता है।

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