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मोदी का जोरदार झटका: अब क्या होगा नेताओं का कैसे लडेगें चुनाव

 Special Coverage News |  9 Nov 2016 8:08 AM GMT  |  New Delhi

मोदी का जोरदार झटका: अब क्या होगा नेताओं का कैसे लडेगें चुनाव

पीलीभीत फैसल मलिक: आम तौर पर ब्लैकमनी यानी कालाधन पर रोक लगा पाना मुश्किल था। आमतौर पर विदेशों में देखा जाये तो ब्लैकमनी की रोक के लिये सरकारे हर पाॅच साल में अपनी करेन्सी का स्वरूप बदल देती है और अपने नागिरिकों से कहती है कि वो अपने नोट नये नोट से बदल लें। ताकि ब्लैकमनी का सफाया हो सके।


इसी तर्ज पर हिन्दुस्तान के इतिहास में मोदी ने यह पहल की है। जोकि सराहनीय है। मोदी की इस पहली से जहाॅ भूमिगत ब्लैकमनी का सफाया होगा तो वहीं राजस्व का भी फायदा होगा यही उनकी सोच है। लेकिन यह सबकुछ कुछ राज्यों में चुनाव होने से पहले होना राजनीतिक चिंता का विषय पार्टियों और नेताओं के लिये बन गया है। जबकि फरवरी 2017 में हिन्दुस्तान के सबसे बडे राज्य में विधानसभा चुनाव होने है। पार्टियाॅ और नेता अपने चुनाव के लिये अभी से कालाधन इक्कठा कर रहे है। तो वहीं मोदी ने गुगली डाली और सबकों एक ही बाल में क्लीन बोल्ड कर दिया। क्योंकि इक्कठे किये गये कालेधन वाले नोट सिर्फ बैंकों से ही बदले जा सकेगें, वो भी 30 दिसम्बर तक।


अमूमन एक विधानसभ चुनाव में प्रत्याशी को औसतन 10-15 लाख रूप्ये का चुनावी व्यय खर्चा दिखाता है, लेकिन हकीकत में यह चुनाव जिताऊ प्रत्याशी 1 से 2 करोड रूप्ये लगाकर खेलता है। लेकिन ऐसे में जहाॅ अब यह पुराने 1000 व 500 के नोट बंद होने से नोताओं के चेहरे पीले पड गये है। सोचने की झमता ही नहीं दिख रही है और हो भी क्यों नहीं, क्योंकि यह झटका चुनाव से ठीक पहले जो मिला है।


वहीं बडी पार्टियों के भी यही हाल होगें, जो चुनाव लडने के लिये अपने प्रत्याशियों को पार्टी फण्ड से रूप्ये देती है। नेताओं ने तो अभी से सोचना शुरू कर दिया होगा कि कहाॅ से पैसा आयेगा, लेकिन क्या राजनैतिक अपने पार्टी फण्ड में जमा रूप्या जनता के सामने लायेगें। भले ही इसका फायदा नेताओं और पार्टियों को ना हो लेकिन जनता को जरूर होगा।

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